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Coronavirus in Uttarakhand: देशभर में प्रसिद्ध बगवाल मेले में पहली बार लटकी तलवार
Mon, 22 Jun 2020 02:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2020 02:54 PM IST
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देवीधुरा का मां बाराही धाम मंदिर।
- फोटो : CHAMPAWAT
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देवीधुरा का बगवाल मेला इस बार नहीं हो सकेगा। हालांकि अभी मेले को निरस्त करने का औपचारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन मेले के नहीं होने की प्रबल संभावना को देखते हुए बगवाल की परंपरा को प्रतीकात्मक रूप से बिना दर्शकों के कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। जिला पंचायत की ओर से संचालित होने वाले इस मेले में हर साल हजारों लोग शिरकत करते रहे हैं।
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चंपावत से 57 किमी दूर देवीधुरा में स्थित मां बाराही धाम मंदिर के खोलीखांड दुबाचौड़ में हर साल आषाड़ी कौतिक (रक्षाबंधन) के दिन बगवाल होती है। फल-फूलों से खेली जाने वाली बगवाल इस बार तीन अगस्त को प्रस्तावित है।
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चार खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) और सात थोक के योद्धा फर्रो के साथ बगवाल में शिरकत करते हैं, लेकिन इस बार कोरोना के चलते दो सप्ताह तक चलने वाले बगवाल मेले के होने की संभावना खत्म हो गई है। मेले में दूरदराज से कारोबारी आते हैं।
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इसलिए होती है बगवाल
क्षेत्र के चार खामों चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग के लोग रक्षाबंधन के दिन बगवाल खेलते हैं। मान्यता है कि पूर्व में यहां नरबलि देने की प्रथा था, लेकिन जब चम्याल खाम की एक वृद्धा के एकमात्र पौत्र की बलि के लिए बारी आई, तो वंशनाश के डर से बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की तपस्या की। देवी मां के प्रसन्न होने पर वृद्धा की सलाह पर चारों खामों ने आपस में युद्ध कर एक मानव बलि के बराबर रक्त बहाकर कर पूजा करने की बात स्वीकार ली। तभी से ही बगवाल का सिलसिला चला आ रहा है।
अभी बगवाल मेले को लेकर कोई बैठक नहीं हुई है। कोरोना के खतरों के मद्देनजर चारों खामों के प्रतिनिधि प्रशासन के साथ मिलकर आगे के हालात पर विचार करेंगे। मेला नहीं होने पर प्रतीकात्मक बगवाल पर विचार किया जाएगा।
- खीम सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष, मां बाराही धाम मंदिर समिति
किसी भी तरह के मेले व भीड़भाड़ पर रोक है। कोविड-19 के खतरे को देखते हुए इस बार देवीधुरा बगवाल मेला होना मुमकिन नहीं लगता है। जिला पंचायत को मेले की तैयारी करने केे लिए कम से कम तीन सप्ताह लगते हैं। लेकिन इस बार न तो इतना समय है और नहीं मेले कराने लायक हालात।
- राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी