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पूर्णागिरि में मेला अनुदान और पेयजल योजना को मंजूरी
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तिलक लगाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी पत्नी गीता धामी को आशीर्वाद देतीं पूर्णागिरि धा
- फोटो : TANAKPUR
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पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्नी गीता धामी के साथ पूर्णागिरि देवी के दर्शन कर पूजा की। पंडित गिरीश पांडे और कमलापति पांडे ने आशीर्वाद दिया और पूर्णागिरि देवी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी। देवी दर्शन करने वाले पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के पहले सीएम हैं। उनसे पहले कभी किसी ने मुख्यमंत्री रहते पूर्णागिरि देवी के दर्शन नहीं किए। पूजा अर्चना के बाद सीएम धामी ने यहां पेयजल योजना की मंजूरी के अलावा मेला अनुदान के लिए राशि मंजूर करने का भी एलान किया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और विधायक कैलाश गहतोड़ी का मंदिर पहुंचने पर माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने मेला क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाले मेला अनुदान को फिर से शुरू करने, ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क की चौड़ाई के विस्तार करने और धूनी स्थल के सौंदर्यीकरण का आग्रह किया। वहां डीएम विनीत तोमर, एसपी देवेंद्र पींचा, मेला मजिस्ट्रेट हिमांशु कफल्टिया, मेलाधिकारी भगवत पाटनी, मंदिर समिति के सचिव सुरेश तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पांडे, कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी, मोहन पांडे, नेत्र बल्लभ तिवारी आदि थे।
एक घंटा पहले पहुंचे सीएम, तय कार्यक्रम में कई बदलाव
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में भैरव मंदिर शनिवार सुबह 6:40 बजे पहुंचना था लेकिन सीएम निर्धारित समय से पहले ही मंदिर क्षेत्र पहुंच गए। जिला प्रशासन की ओर से शुक्रवार को जारी कार्यक्रम और शनिवार को हुए सीएम के कार्यक्रम में काफी अंतर रहा। तय कार्यक्रम के मुताबिक सीएम को शुक्रवार रात को बनबसा एनएचपीसी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करना था, लेकिन उन्होंने रात्रि विश्राम खटीमा में किया। स्टेडियम में जन संवाद कार्यक्रम था लेकिन ये कार्यक्रम भी स्टेडियम में न होकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में कर दिया गया। इस संबंध में डीएम विनीत तोमर ने कहा कि कार्यक्रम में बदलाव की प्रशासन को जानकारी नहीं थी।
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नवरात्र पर उमड़े 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। नवरात्र शुरू होने के साथ ही मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र जय माता दी... के उद्घोष से सराबोर है। मेले में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। शनिवार को पहले दिन 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेका। सीएम के दौरे और भारी भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को दुश्वारी भी हुई। उन्हें कई जगह रोका गया। साथ ही सीढ़ियों से मुख्य मंदिर तक करीब 400 मीटर के फासले को तय कर देवी दर्शन करने में ढाई घंटे लगे। वाहनों का लंबा काफिला रहा। इसके बावजूद आमतौर पर जाम की समस्या कम रही। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त था।
कठिन राह को पार कर कर रहे मां के दर्शन
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम में सुविधाओं के विस्तार के बाद भी श्रद्धालु की दिक्कतें पूरी तरह दूर नहीं हुई है। ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर के बीच ही पांच जगहों पर श्रद्धालुओं को बेहद मुश्किल रास्ते पर चलकर देवी दरबार पहुंचना पड़ रहा है। ये शार्ट कट रास्ते जोखिम से भरे हैं। लेकिन उनमें किसी तरह के अवरोधक नहीं लगाने की वजह से खतरे बरकरार हैं।
पांव में लगी चोट के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, किए दर्शन
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि देवी के प्रति भक्तगणों की अकाट्य आस्था है। इसका प्रदर्शन अनेकों बार होता है। ऐसा ही एक वाकया पहली नवरात्र को भी हुआ। दिल्ली के एक युवक के टनकपुर पहुंचने से पहले चोट लग गई और वह चलने लायक स्थिति में नहीं था। शिव नामक इस युवक ने देवी दर्शन की जिद ठानी, तो उनके दो साथियों ने भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक करीब साढ़े सात किमी लौटाफेरी का फासला सहारा देकर पार कराया। दर्शन से अभिभूत शिव फिर देवी दरबार आने की बात कहते हैं।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और विधायक कैलाश गहतोड़ी का मंदिर पहुंचने पर माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने मेला क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाले मेला अनुदान को फिर से शुरू करने, ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क की चौड़ाई के विस्तार करने और धूनी स्थल के सौंदर्यीकरण का आग्रह किया। वहां डीएम विनीत तोमर, एसपी देवेंद्र पींचा, मेला मजिस्ट्रेट हिमांशु कफल्टिया, मेलाधिकारी भगवत पाटनी, मंदिर समिति के सचिव सुरेश तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पांडे, कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी, मोहन पांडे, नेत्र बल्लभ तिवारी आदि थे।
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एक घंटा पहले पहुंचे सीएम, तय कार्यक्रम में कई बदलाव
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में भैरव मंदिर शनिवार सुबह 6:40 बजे पहुंचना था लेकिन सीएम निर्धारित समय से पहले ही मंदिर क्षेत्र पहुंच गए। जिला प्रशासन की ओर से शुक्रवार को जारी कार्यक्रम और शनिवार को हुए सीएम के कार्यक्रम में काफी अंतर रहा। तय कार्यक्रम के मुताबिक सीएम को शुक्रवार रात को बनबसा एनएचपीसी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करना था, लेकिन उन्होंने रात्रि विश्राम खटीमा में किया। स्टेडियम में जन संवाद कार्यक्रम था लेकिन ये कार्यक्रम भी स्टेडियम में न होकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में कर दिया गया। इस संबंध में डीएम विनीत तोमर ने कहा कि कार्यक्रम में बदलाव की प्रशासन को जानकारी नहीं थी।
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नवरात्र पर उमड़े 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। नवरात्र शुरू होने के साथ ही मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र जय माता दी... के उद्घोष से सराबोर है। मेले में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। शनिवार को पहले दिन 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेका। सीएम के दौरे और भारी भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को दुश्वारी भी हुई। उन्हें कई जगह रोका गया। साथ ही सीढ़ियों से मुख्य मंदिर तक करीब 400 मीटर के फासले को तय कर देवी दर्शन करने में ढाई घंटे लगे। वाहनों का लंबा काफिला रहा। इसके बावजूद आमतौर पर जाम की समस्या कम रही। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त था।
कठिन राह को पार कर कर रहे मां के दर्शन
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम में सुविधाओं के विस्तार के बाद भी श्रद्धालु की दिक्कतें पूरी तरह दूर नहीं हुई है। ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर के बीच ही पांच जगहों पर श्रद्धालुओं को बेहद मुश्किल रास्ते पर चलकर देवी दरबार पहुंचना पड़ रहा है। ये शार्ट कट रास्ते जोखिम से भरे हैं। लेकिन उनमें किसी तरह के अवरोधक नहीं लगाने की वजह से खतरे बरकरार हैं।
पांव में लगी चोट के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, किए दर्शन
पूर्णागिरि धाम/टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि देवी के प्रति भक्तगणों की अकाट्य आस्था है। इसका प्रदर्शन अनेकों बार होता है। ऐसा ही एक वाकया पहली नवरात्र को भी हुआ। दिल्ली के एक युवक के टनकपुर पहुंचने से पहले चोट लग गई और वह चलने लायक स्थिति में नहीं था। शिव नामक इस युवक ने देवी दर्शन की जिद ठानी, तो उनके दो साथियों ने भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक करीब साढ़े सात किमी लौटाफेरी का फासला सहारा देकर पार कराया। दर्शन से अभिभूत शिव फिर देवी दरबार आने की बात कहते हैं।