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आखिर सत्यापन को सजग हुई पुलिस
ब्यूरो/अमर उजाला/चंपावत
Updated Mon, 11 May 2015 06:54 PM IST
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आमतौर पर बाहरी और अजनबियों के सत्यापन को लेकर हीलाहवाली करने वाली पुलिस पहली बार सत्यापन में गंभीरता दिखा रही है। अब पुलिस अभियान चलाकर सत्यापन करा रही है। अप्रैल में ही 1123 लोगों का सत्यापन कराया जा चुका है।
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बाहरी और अनजान तत्व कई बार अपराधिक वारदात को अंजाम देकर आसानी से रफूचक्कर हो जाते हैं। इसकी वजह उनसे संबंधित जानकारी का नहीं होना होता है। जिस कारण उनकी पहचान कठिन हो जाती है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद बाहरी और अजनबियों के सत्यापन को अनिवार्य करने के लिए कानूनी जामा भी पहनाया गया था, लेकिन कानूनी क्रियान्वयन में दिलचस्पी नहीं होने से सत्यापन का काम ठंडे बस्ते में ही रहा।
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एसपी दिलीप सिंह कुंवर की सख्त हिदायत के बाद अब पुलिस इसे लेकर सक्रिय हो गई है। अभियान चलाकर सत्यापन कर रही है। अप्रैल माह में ही 1123 लोगों का सत्यापन किया गया। इसमें से 100 की जानकारी संबंधित क्षेत्रों के थानों से सत्यापित होकर प्राप्त भी हो गई है।
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पिछले साल रही हीलाहवाली
चंपावत। कानून बनने के बावजूद सत्यापन को लेकर पिछले वर्षों तक गंभीरता और सजगता की अक्सर कमी रही है। जिले की 2.60 लाख आबादी में करीब 11 प्रतिशत नागरिक इस दायरे में आते हैं, लेकिन 28 हजार लोगों में सत्यापन बीते सालों में बमुश्किल 6500 का ही हो सका है।
2007 से सत्यापन की अनिवार्यता की गई है। इसके तहत किराएदार, घरेलू नौकरों, श्रमिकों और अजनबियों का सत्यापन जरूरी है। सत्यापन के लिए आवेदनपत्र के जरिए थाने में जानकारी देने की जिम्मेदारी भवन, होटल स्वामियों, व्यापारियों और निर्माण कंपनियों के प्रबंधक अथवा ठेकेदारों की है। कोतवाल देवेंद्र सिंह दिगारी का कहना है कि भरे हुए तथ्यों की तस्दीक संबंधित थाने में भेजकर की जाती है।