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जंगली जानवरों के बाद अब पाले की मार

Sun, 20 Dec 2015 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट Updated Sun, 20 Dec 2015 11:14 PM IST
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After the killing of wild animals nursed

काश्तकारों के लिए सुअर, बंदर और दूसरे जंगली जानवर मुसीबत बनते हैं तो अब इस परेशानी में पाले ने भी बढ़ोतरी कर दी है। पाले के प्रकोप से किसानों की फसल बर्बाद हो रही है।

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इस साल मार्च-अप्रैल में अतिवृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा। इस समय हो रही  राई, पालक, मेथी, मूली जैसी पहाड़ी सब्जियां किसानों की आजीविका का जरिया बन रही हैं मगर पाला उनके लिए खलनायक बनकर सामने आया है। किसानों का कहना है कि पाले के चलते उनकी फसलें पीली होकर बर्बाद हो रही है। एक समय किसान अपने वर्ष भर के खाने के लिए अनाज एकत्र करने के अलावा बाजारों में भी बेचा करते थे, वहीं आज हालात यह है कि वह बाजार से राशन खरीदने को मजबूर हैं।
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इस मौसम में 40 से 50 हजार रुपये की सब्जी बिक जाती थी। पाले के चलते उनकी ज्यादातर फसल चौपट हो गई है। जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। पालक, मैंथी, राई पाले की चपेट में आ गई है। भारी पाला गिरने से फसल पीली पड़ रही है। -बलदेव राय, प्रगतिशील काश्तकार, रायनगर चौड़ी।
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अत्यधिक पाला गिरने से फसल खराब हो रही है। किसान खेतों में नमी बनाए रखें। हर दूसरे-तीसरे दिन खेतों की सिंचाई करने के बाद निराई-गुड़ाई करें। यदि जमीन शुष्क रहेगी, तो पाले का अधिक प्रभाव पड़ेगा। -भूपेंद्र प्रकाश जोशी, सहायक विकास अधिकारी, उद्यान विभाग।

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