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खुरपका-मुंहपका की चपेट में आए मवेशी
Champawat
Updated Wed, 15 Jan 2014 05:52 AM IST
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लोहाघाट। खुरपका और मुहंपका रोग की चपेट में तीन गांव के करीब 35 मवेशी आ गए हैं। पशुपालन विभाग ने रोग से निपटने के लिए टीम भेजी है।
पशु चिकित्साधिकारी डा. डीके चंद ने बताया कि रायनगर चौड़ी, ठांठा, सुदर्का गांव में 35 पशु इस रोग से पीड़ित हैं। इनका इलाज किया जा रहा है। डा. चंद का कहना है कि खुरपका और मुंहपका एक ही रोग हैं। छाले पड़ने के बाद पशु मुंह से लार छोड़ते हैं। फिर मुंह से झाग के बाद मवेशियों को तेज बुखार आता है और वे पस्त पड़ जाते हैं। बाद में यह रोग खुरों को भी पकड़ लेता है। इस रोग से बचने का फूड एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) के टीके है।
पशुपालन विभाग का कहना है कि इस टीके से गाय की दूध की मात्रा कम हो जाती है। इस कारण काफी पशुपालक इस टीके को लगवाने से बचते हैं। खेतीखान की पशु चिकित्साधिकारी डा. मीना हरीश चंद ने भी पशुपालकों को इस रोग के प्रति जागरूक किया है।
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पशु चिकित्साधिकारी डा. डीके चंद ने बताया कि रायनगर चौड़ी, ठांठा, सुदर्का गांव में 35 पशु इस रोग से पीड़ित हैं। इनका इलाज किया जा रहा है। डा. चंद का कहना है कि खुरपका और मुंहपका एक ही रोग हैं। छाले पड़ने के बाद पशु मुंह से लार छोड़ते हैं। फिर मुंह से झाग के बाद मवेशियों को तेज बुखार आता है और वे पस्त पड़ जाते हैं। बाद में यह रोग खुरों को भी पकड़ लेता है। इस रोग से बचने का फूड एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) के टीके है।
पशुपालन विभाग का कहना है कि इस टीके से गाय की दूध की मात्रा कम हो जाती है। इस कारण काफी पशुपालक इस टीके को लगवाने से बचते हैं। खेतीखान की पशु चिकित्साधिकारी डा. मीना हरीश चंद ने भी पशुपालकों को इस रोग के प्रति जागरूक किया है।
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