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मंगोली गांव के 31 परिवार आज भी शौचालय विहीन
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:31 PM IST
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चंपावत। लोहाघाट विकासखंड का मंगोली गांव यूं तो जिले के तमाम अन्य ग्रामीण इलाकों की तरह ही खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुका है मगर गांव के भीतर पड़ताल करने पर इन दावों की हकीकत सामने आई है। गांव में 31 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। ये सभी परिवार गांव से दूर जंगल या दूसरी खुली जगह पर शौच करने को मजबूर हैं।
दो साल पहले राज्य स्थापना के मौके पर 9 नवंबर 2016 को चंपावत जिले को ओडीएफ घोषित किया गया था। जिले में 49209 शौचालय बनाए गए हैं मगर इसके बावजूद जिले के कई हिस्सों में लोगों के पास शौचालय नहीं है। मंगोली गांव में कुल 230 परिवारों में से 199 के पास ही शौचालय हैं। ग्राम प्रधान चांद बोहरा का कहना है कि ग्राम पंचायत के बस्टानौली, मंगोली, भुमका, बटोली, खर्कागढ़ और कौलानी तोक के 31 परिवार शौचालल विहीन हैं।
ज्यादातर परिवार गरीब तबके से होने की वजह से खुद के खर्ज से शौचालय बनाने की स्थिति में नहीं हैं। भागीरथी देवी, प्रकाश सिंह आदि का कहना है कि शौचालय नहीं होने से वे अभी भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। घर से दूर खेत या जंगल में जाने में खतरा भी रहता है। प्रधान का कहना है कि गांव के इन परिवारों के लिए शौचालय के प्रस्ताव स्वजल को भेजे गए हैं।
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मंगोली शौचालय विहीन परिवार
भागीरथी देवी, जैमती, दिलीप सिंह, भुवन राम, रमेश सिंह, चंदन सिंह, शंकर दत्त पांडेय, रमेश राम, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मण सिंह, निर्मला देवी, हीरा सिंह, कुंवर सिंह, रेखा बोहरा, निशा देवी, जानकी, आशा, ईश्वरी, कलावती, रजनी, रेखा, ममता, पुष्पा, जगदीश राम, नंदा देवी, गीता, मुन्नी, भावना, कमला, प्रहलाद राम और निर्मला।
मंगोली गांव में 2011 के सर्वे के हिसाब से सभी परिवारों के पास शौचालय बनाए जा चुके हैं। ये 31 परिवार वे हैं, जो 2011 के बाद परिवारों से अलग हुए हैं या जिन्होंने नए मकान बनाए हैं। इन परिवारों के लिए शौचालय के निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
- हरगोविंद भट्ट, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।
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दो साल पहले राज्य स्थापना के मौके पर 9 नवंबर 2016 को चंपावत जिले को ओडीएफ घोषित किया गया था। जिले में 49209 शौचालय बनाए गए हैं मगर इसके बावजूद जिले के कई हिस्सों में लोगों के पास शौचालय नहीं है। मंगोली गांव में कुल 230 परिवारों में से 199 के पास ही शौचालय हैं। ग्राम प्रधान चांद बोहरा का कहना है कि ग्राम पंचायत के बस्टानौली, मंगोली, भुमका, बटोली, खर्कागढ़ और कौलानी तोक के 31 परिवार शौचालल विहीन हैं।
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ज्यादातर परिवार गरीब तबके से होने की वजह से खुद के खर्ज से शौचालय बनाने की स्थिति में नहीं हैं। भागीरथी देवी, प्रकाश सिंह आदि का कहना है कि शौचालय नहीं होने से वे अभी भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। घर से दूर खेत या जंगल में जाने में खतरा भी रहता है। प्रधान का कहना है कि गांव के इन परिवारों के लिए शौचालय के प्रस्ताव स्वजल को भेजे गए हैं।
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मंगोली शौचालय विहीन परिवार
भागीरथी देवी, जैमती, दिलीप सिंह, भुवन राम, रमेश सिंह, चंदन सिंह, शंकर दत्त पांडेय, रमेश राम, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मण सिंह, निर्मला देवी, हीरा सिंह, कुंवर सिंह, रेखा बोहरा, निशा देवी, जानकी, आशा, ईश्वरी, कलावती, रजनी, रेखा, ममता, पुष्पा, जगदीश राम, नंदा देवी, गीता, मुन्नी, भावना, कमला, प्रहलाद राम और निर्मला।
मंगोली गांव में 2011 के सर्वे के हिसाब से सभी परिवारों के पास शौचालय बनाए जा चुके हैं। ये 31 परिवार वे हैं, जो 2011 के बाद परिवारों से अलग हुए हैं या जिन्होंने नए मकान बनाए हैं। इन परिवारों के लिए शौचालय के निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
- हरगोविंद भट्ट, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।