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एक साल बाद भी नहीं हो पाया पंचेश्वर में पेड़ों का माइक्रो सर्वे
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:08 PM IST
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चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पंचेश्वर बांध में पेड़ों की गिनती का काम ही अटक गया है। यही परियोजना हैं जिसको प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में पिथौरागढ़ मेें हुई जनसभा में सर्वोच्च प्राथमिकता का बताया था। वन विभाग ने सितंबर 2017 से डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों का माइक्रो सर्वे शुरू किया था और समय पर धनराशि नहीं मिलने से आठ महीने से पेड़ों का माइक्रो सर्वे ठप है।
पंचेश्वर बांध में लगभग चार लाख से अधिक पेड़ डूब क्षेत्र में आने की संभावना है। इसमें से वन विभाग ने अब तक 60 हजार पेड़ों में लाल निशान लगाया है। वन विभाग ने जनवरी 2018 तक पेड़ों का माइक्रो सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन माइक्रो सर्वे के लिए वन विभाग को अब तक कोई धनराशि नहीं मिल पाई है।
बजट के अभाव के चलते अब तक हुई पेड़ों की गिनती की धनराशि मजदूरों को वन विभाग के माध्यम से दी गई है। वन विभाग के अधिकारी और कार्यदायी कंपनी वैप्कोस के अधिकारियों के बीच पंचेश्वर में पेड़ों के माइक्रो सर्वें के लिए कई बार बैठकें भी चुकी हैं। उसके बाद भी वन विभाग को वैप्कोस से कोई पैसा नहीं मिला है।
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पंचेश्वर में पेड़ों की माइक्रो सर्वे के लिए अभी तक धनराशि नहीं मिल पाई हैं। बजट की मांग की गई है। अब तक 60 हजार से अधिक पेड़ों में लाल निशान लगाया जा चुका है।
हेम चंद्र गहतोड़ी, वन क्षेत्राधिकारी, काली कुमाऊं लोहाघाट।
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पंचेश्वर बांध में लगभग चार लाख से अधिक पेड़ डूब क्षेत्र में आने की संभावना है। इसमें से वन विभाग ने अब तक 60 हजार पेड़ों में लाल निशान लगाया है। वन विभाग ने जनवरी 2018 तक पेड़ों का माइक्रो सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन माइक्रो सर्वे के लिए वन विभाग को अब तक कोई धनराशि नहीं मिल पाई है।
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बजट के अभाव के चलते अब तक हुई पेड़ों की गिनती की धनराशि मजदूरों को वन विभाग के माध्यम से दी गई है। वन विभाग के अधिकारी और कार्यदायी कंपनी वैप्कोस के अधिकारियों के बीच पंचेश्वर में पेड़ों के माइक्रो सर्वें के लिए कई बार बैठकें भी चुकी हैं। उसके बाद भी वन विभाग को वैप्कोस से कोई पैसा नहीं मिला है।
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पंचेश्वर में पेड़ों की माइक्रो सर्वे के लिए अभी तक धनराशि नहीं मिल पाई हैं। बजट की मांग की गई है। अब तक 60 हजार से अधिक पेड़ों में लाल निशान लगाया जा चुका है।
हेम चंद्र गहतोड़ी, वन क्षेत्राधिकारी, काली कुमाऊं लोहाघाट।