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बिजली बिल अधिक आने से किसानों में रोष
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:08 PM IST
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बनबसा (चंपावत)।
सिंचाई के लिए बिजली का प्रयोग करने वाले किसानों के बिल अधिक आने से उनमें रोष हैं। उन्होंने विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मीटर रीडिंग के हिसाब से बिल भेजने की मांग की है। साथ ही शीघ्र न्यायोचित बिल नहीं देने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र के अधिकतर किसान खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग करते हैं, लेकिन विभाग उन्हें अधिक बिल भेज रहा है। सीएम को भेजे ज्ञापन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से जनवरी 2018 तक क्षेत्र के किसानों के सिंचाई वाले बिजली मूल्य बढ़ा कर भेजे गए हैं, जो न्यायोचित नहीं है। किसानों को पिछले चार वर्षों का बिल एकमुश्त भेजकर उनके साथ नाइंसाफी की जा रही है। बताया गया कि क्षेत्र में छोटे और मझोले किसानों को सबसे कम 28 हजार और अधिकतम 80 हजार रुपये का बिल दिया गया है।
इसका एकसाथ भुगतान करने में क्षेत्र के किसान असमर्थ हैं। लिखा है कि किसानों से सिंचाई बिल प्रति यूनिट 12 रुपये वसूला जा रहा है जो कि व्यापारिक बिलों से भी अधिक है। ज्ञापन में जगदीश कलौनी, देवेंद्र देऊपा, सुरेश सक्सेना, जगदीश राम, चंद्रशेखर देऊपा, जगत सिंह, लक्ष्मण सिंह, सौरभ सिंह आदि किसानों के हस्ताक्षर हैं।
सिंचाई के लिए बिजली का प्रयोग करने वाले किसानों के बिल अधिक आने से उनमें रोष हैं। उन्होंने विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मीटर रीडिंग के हिसाब से बिल भेजने की मांग की है। साथ ही शीघ्र न्यायोचित बिल नहीं देने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र के अधिकतर किसान खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग करते हैं, लेकिन विभाग उन्हें अधिक बिल भेज रहा है। सीएम को भेजे ज्ञापन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से जनवरी 2018 तक क्षेत्र के किसानों के सिंचाई वाले बिजली मूल्य बढ़ा कर भेजे गए हैं, जो न्यायोचित नहीं है। किसानों को पिछले चार वर्षों का बिल एकमुश्त भेजकर उनके साथ नाइंसाफी की जा रही है। बताया गया कि क्षेत्र में छोटे और मझोले किसानों को सबसे कम 28 हजार और अधिकतम 80 हजार रुपये का बिल दिया गया है।
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इसका एकसाथ भुगतान करने में क्षेत्र के किसान असमर्थ हैं। लिखा है कि किसानों से सिंचाई बिल प्रति यूनिट 12 रुपये वसूला जा रहा है जो कि व्यापारिक बिलों से भी अधिक है। ज्ञापन में जगदीश कलौनी, देवेंद्र देऊपा, सुरेश सक्सेना, जगदीश राम, चंद्रशेखर देऊपा, जगत सिंह, लक्ष्मण सिंह, सौरभ सिंह आदि किसानों के हस्ताक्षर हैं।
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