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कक्षा एक से 12 तक के छात्र-छात्राओं का बनेगा डाटा बैंक
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:17 PM IST
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चंपावत। सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा एक से 12 तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का डाटा बैंक तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक कै.आलोक शेखर तिवारी द्वारा सभी जिलों के विभागीय अधिकारियों निर्देश दिए जा चुके हैं।
मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने बताया कि12 वीं कक्षा तक अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी का विवरण केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए साफ्टवेयर स्कूल डाटा मैनेज इनफॉर्मेशन सिस्टम (एसडीएमआईएस) के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं का विवरण 30 सितंबर 2017 की छात्र संख्या के आधार पर 30 मार्च तक अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाना है। इस संबंध में सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पारदर्शिता बढे़गी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा
चंपावत। विभाग के अनुसार इंटरमीडिएट तक अध्ययनरत छात्रों का डाटा ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। स्कूलों फर्जी छात्र संख्या दिखाकर किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के भुगतान, ड्रेस, पुस्तकों के वितरण आदि कार्य भी छात्र संख्या के आधार आसानी से किए जा सकेंगे।
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छात्र नामांकन के आधार पर होता है बजट आवंटन
चंपावत। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक सत्यनारायण के अनुसार छात्रों का डाटा बैंक तैयार करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें ट्रैक करना है। केंद्र सरकार की ओर से बजट आवंटन एसडीएमआईएस में छात्र नामांकन के आधार पर ही किया जाता है। इसलिए प्रत्येक छात्र-छात्रा का विवरण दिया जाना आवश्यक है।
मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने बताया कि12 वीं कक्षा तक अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी का विवरण केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए साफ्टवेयर स्कूल डाटा मैनेज इनफॉर्मेशन सिस्टम (एसडीएमआईएस) के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं का विवरण 30 सितंबर 2017 की छात्र संख्या के आधार पर 30 मार्च तक अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाना है। इस संबंध में सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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पारदर्शिता बढे़गी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा
चंपावत। विभाग के अनुसार इंटरमीडिएट तक अध्ययनरत छात्रों का डाटा ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। स्कूलों फर्जी छात्र संख्या दिखाकर किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के भुगतान, ड्रेस, पुस्तकों के वितरण आदि कार्य भी छात्र संख्या के आधार आसानी से किए जा सकेंगे।
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छात्र नामांकन के आधार पर होता है बजट आवंटन
चंपावत। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक सत्यनारायण के अनुसार छात्रों का डाटा बैंक तैयार करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें ट्रैक करना है। केंद्र सरकार की ओर से बजट आवंटन एसडीएमआईएस में छात्र नामांकन के आधार पर ही किया जाता है। इसलिए प्रत्येक छात्र-छात्रा का विवरण दिया जाना आवश्यक है।