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स्थानांतरण में पहाड़ के शिक्षकों के साथ भेदभाव का आरोप
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लोहाघाट (चंपावत)। राजकीय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग पर अनिवार्य स्थानांतरण सूची में पर्वतीय क्षेत्रों में सेवारत शिक्षकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। स्थानांतरण सूची में संशोधन की मांग को लेकर संघ ने प्रांतीय कार्यकारिणी को ज्ञापन भेजा है।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पान सिंह मेहता और महामंत्री जगदीश अधिकारी द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा विभाग ने पर्वतीय जिलों के शिक्षकों को देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित विद्यालयों के लिए आवेदन करने पर रोक लगाई है। संघ का कहना है कि स्थानांतरण अधिनियम 2017 में इस तरह का कोई भी नियम नहीं है।
उन्होंने कहा कि विभाग के इस नए आदेश से वर्षों तक पहाड़ में सेवा देने वाले शिक्षक मैदानी क्षेत्रों में नहीं जा सकते हैं। इस निर्णय को समानता और स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बताया गया है।
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संघ ने प्रांतीय कार्यकारिणी पदाधिकारियों से जल्द विभागीय अधिकारियों से मिलकर रिक्तियों के सापेक्ष शत-प्रतिशत स्थानांतरण और इस प्रकार के भेदभाव वाले नियमों को हटाने की मांग की है।
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राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पान सिंह मेहता और महामंत्री जगदीश अधिकारी द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा विभाग ने पर्वतीय जिलों के शिक्षकों को देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित विद्यालयों के लिए आवेदन करने पर रोक लगाई है। संघ का कहना है कि स्थानांतरण अधिनियम 2017 में इस तरह का कोई भी नियम नहीं है।
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उन्होंने कहा कि विभाग के इस नए आदेश से वर्षों तक पहाड़ में सेवा देने वाले शिक्षक मैदानी क्षेत्रों में नहीं जा सकते हैं। इस निर्णय को समानता और स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बताया गया है।
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संघ ने प्रांतीय कार्यकारिणी पदाधिकारियों से जल्द विभागीय अधिकारियों से मिलकर रिक्तियों के सापेक्ष शत-प्रतिशत स्थानांतरण और इस प्रकार के भेदभाव वाले नियमों को हटाने की मांग की है।