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जिला पंचायत की डेढ़ माह की मेहनत पर पानी फिरा

Wed, 11 Oct 2017 10:47 PM IST
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:47 PM IST
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जिला पंचायत की डेढ़ माह की मेहनत पर पानी फिरा

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चंपावत। जिला पंचायत को जिला योजना के अंतर्गत पहली बार राशि आवंटित की गई थी। 23 अगस्त को प्रभारी मंत्री रेखा आर्या की अध्यक्षता में मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अनुमोदित हुई 40.97 करोड़ रुपये की जिला योजना में से 5 करोड़ रुपये की राशि जिला पंचायत के लिए स्वीकृत की गई थी। इस राशि से जिला पंचायत को दो किलोमीटर तक की ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराना था। लेकिन अब शासन ने नए आदेश जारी करते हुए कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को बना दिया है।

शासन ने 2016 में दो किलोमीटर से कम लंबाई की ग्रामीण सड़क का निर्माण जिला पंचायत के जरिये कराने का आदेश दिया था। इस शासनादेश के क्रम में चंपावत सहित प्रदेश की सभी जिला पंचायतों को पहली बार जिला योजना में धनराशि मिली। चंपावत जिले में 50 ग्रामीण सड़कों के लिए 5 करोड़ रुपये के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत के अभियंता बीते डेढ़ महीनों से मौका मुआयना करने से लेकर इन ग्रामीण सड़कों के आगणन तक की तैयारी में लगे थे। मगर अब उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया है। इससे ज्यादातर जिला पंचायत सदस्यों में भी नाराजगी है।
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जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह का कहना है कि यह निर्णय न केवल पंचायत की अवमानना है, बल्कि पंचायती संस्थाओं को विकास की मुख्य धारा से अलग करने की साजिश भी।
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कोट....
जिला पंचायत में अभियंता का पद खाली है। इस काम को कनिष्ठ अभियंता को अतिरिक्त दायित्व देकर कराया जा रहा था। 23 अगस्त बाद से अभियंताओं ने रोजमर्रा के कई काम छोड़कर 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 50 ग्रामीण सड़कों के सर्वे से लेकर आगणन तक में लगे थे। मुख्य विकास अधिकारी के पंचायत को बुधवार को मिले पत्र के बाद अब इन सड़कों पर पंचायत काम नहीं कराएगी।

राजेश कुमार,
अपर मुख्य अधिकारी,
जिला पंचायत, चंपावत।

जिला योजना में अब तक 53 प्रतिशत रकम अवमुक्त
चंपावत के जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी (डीएसटीओ) नंदा बल्लभ बचखेती का कहना है कि मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में जिला पंचायत से काम वापस लेने के आदेश किए गए हैं। अभी जिला पंचायत को एक भी रुपये अवमुक्त नहीं किया गया था। अब ये कार्य लोक निर्माण विभाग कराएगा। वैसे जिले की 40.97 करोड़ रुपये की जिला योजना के सापेक्ष 21.87 करोड़ (53.38 प्रतिशत) रुपये अवमुक्त हुए हैं। ये रकम बीते वर्ष के निर्माणाधीन और लटके काम के अलावा वेतन मद में खर्च किया जा रहा है। नए कार्यों के लिए अभी धनराशि आवंटित नहीं की गई है।
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