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दो माह में फेल हो गए लोहाघाट में पानी के नौ नमूने

Thu, 31 May 2018 11:44 PM IST
Updated Thu, 31 May 2018 11:44 PM IST
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दो माह में फेल हो गए लोहाघाट में पानी के नौ नमूने
लोहाघाट (चंपावत)। क्षेत्र के कई लोग लीवर की बीमारी से ग्रस्त हैं। क्षेत्र में पीने का पानी बहुत प्रदूषित है। दो महीने में क्षेत्र के पानी के नौ नमूने फेल हो चुके हैं।
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करीब डेढ़ माह पहले जिला अस्पताल से हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल जांच को भेजे गए खून के नमूनों ने यहां की भयावह तस्वीर उजागर की है। इसमें करीब 80 प्रतिशत मामले लीवर की समस्या से ग्रस्त पाए गए। इसकी मुख्य वजह यहां लोगों को मिल रहा प्रदूषित पानी है। काफी बड़ी आबादी को पानी की आपूर्ति प्रदूषित नदी वाले स्रोत से हो रही है। लोहाघाट क्षेत्र में बीते दो महीनों में पानी के नौ नमूने फेल हो चुके हैं। लोहाघाट क्षेत्र की अधिकांश आबादी लोहावती नदी के पानी पर आश्रित है, मगर इससे मिलने वाला पानी काफी हद तक गंदा है। इसे लेकर अनेकों बार यहां के लोग आवाज भी उठा चुके हैं। मगर संबंधित अधिकारी उदासीन बने बैठे हैं।
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चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण लोहावती नदी से किया गया है। नदी से करीब 800 मी दूरी पर शमशान घाट है। नगर क्षेत्र से निकलने वाले नालों का गंदा पानी भी सीधे नदी में प्रवाहित होता है। यही पानी पाटन, चांदमारी, ट्रेजरी मोहल्ला सहित क्षेत्र के काफी बड़े हिस्से में सप्लाई होता है।
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इधर जल संस्थान द्वारा 2017 से अब तक पानी की शुद्धता के परीक्षण के लिए कुल 1477 नमूने लिए गए, जिसमें से 9 नमूने प्रदूषित जल वाले पाए गए। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि ये सभी प्रदूषित नमूने लोहाघाट क्षेत्र के ही है। अलबत्ता बनस्वाड़ गधेरे, फोर्ती और ऋषेश्वर नलकूप का पानी काफी हद तक पीने योग्य है।

लोहावती नदी में बनी चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना ही नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए एकमात्र विकल्प है। पेयजल की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। पानी को सैडिमेंटशन, फिल्टरेशन, क्लोरोनेशन के बाद वितरित किया जा रहा है।

- पवन बिष्ट, अपर सहायक अभियंता, जल संस्थान, लोहाघाट।

उबले पानी का ही सेवन करें : डॉ. बोहरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. रवींद्र बोहरा का कहना है कि दूषित पानी पीने से लोगों को टायफाइड, डायरिया, कोलेरा, पीलिया सहित पेट संबंधी कई बीमारियां होती हैं। लोहाघाट अस्पताल में पीलिया के रोगियों की तादात काफी है। इससे बचने के लिए पानी को उबाल कर सेवन किया जाए।
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