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पशुओं के इलाज को लग रही 45 किमी की दौड़
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:53 PM IST
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रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी के केशव गिरि की भैंस एकाएक बीमार हो गई। इलाज के लिए 45 किमी दूर खेतीखान ले जाते वक्त रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ऐसे हाल लधिया घाटी के कई गांवों के कई पशुपालकों के हैं। वजह रीठा साहिब व भिंगराड़ा के पशु प्रसार केंद्रों का इस साल फरवरी से बंद होना है।
गांव में इलाज की सुविधा नहीं मिलने से उन्हें खेतीखान, लोहाघाट या चंपावत के पशु अस्पताल में लाने में पांच सौ रुपये तक का खर्च हो जाता है। यहां के लोग लंबे समय से पशुओं के इलाज की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हालत में कतई सुधार नहीं हो रहा है। लधिया क्षेत्र के चार हजार से अधिक पशुपालकों के लिए रीठा साहिब और भिंगराड़ा में दो पशुधन प्रसार केंद्र हैं। रीठा साहिब केंद्र तो पिछले साल से ही बगैर कर्मी के हैं, वहीं इस साल फरवरी में पशुधन प्रसार अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से मार्च से भिंगराड़ा का पशु केंद्र भी बंद हो गया।
नतीजा यह हो रहा है कि मवेशियों के बीमार होने पर क्षेत्र के दो दर्जन गांवों के मवेशियों को इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है। लधिया घाटी में लोग खेती के साथ पशुपालन का काम बहुतायत में करते हैं। शेरनाथ, कुंदन बिष्ट, प्रमोद बोहरा, रवींद्र बोहरा, केशवी देवी सहित तमाम ग्रामीणों ने जल्द से जल्द पशुधन प्रसार केंद्रों में कर्मियों की तैनाती की मांग की है।
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सिर्फ लधिया घाटी ही नहीं जिले के कुल 9 पशु केंद्रों में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। कर्णकरायत, इजड़ा, देवीधुरा, मंच, ओलखढुंगा, बसेड़ी, ज्योश्यूड़ा, चौड़ामेहता व भिंगराड़ा में पशु प्रसार अधिकारी नहीं होने से पशुपालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जिले में फार्मेसिस्टों की भी भारी कमी
चंपावत जिले में भले ही 2.45 लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशुपालन पर आश्रित हैं, मगर यहां पशुपालन विभाग की सेहत ठीक नहीं है। पशुधन प्रसार अधिकारियों की ही कमी नहीं है, जिले के 14 पशु अस्पतालों में से 9 में फार्मेसिस्ट भी नहीं है। यहां तक कि चंपावत का पशु अस्पताल भी बगैर फार्मेसिस्ट के चल रहा है। चंपावत जिले के 14 पशु अस्पतालों को संचालित करने के लिए 15 फार्मेसिस्टों के पद सृजित हैं। लेकिन तैनाती इनमें से महज 6 की है। 8 अस्पतालों (चंपावत राजकीय पशु अस्पताल में दो पद, राजकीय सहायक पशु अस्पताल चंपावत, टनकपुर, नरसिंहडांडा, चमदेवल, बर्दाखान, रेगड़ू व पाटी) में एक भी फार्मेसिस्ट नहीं है।
कोट
लधिया घाटी में रीठा साहिब व भिंगराड़ा के पशुधन प्रसार केंद्र कर्मियों की कमी से बंद है। जिले में इसके अलावा कई अन्य केंद्रों में भी कर्मियों की कमी है। काम चलाने के लिए विभाग इन स्थानों में सचल पशु शिविर लगा राहत पहुंचाने का प्रयास करता है।
डॉ.बीएस जंगपांगी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
गांव में इलाज की सुविधा नहीं मिलने से उन्हें खेतीखान, लोहाघाट या चंपावत के पशु अस्पताल में लाने में पांच सौ रुपये तक का खर्च हो जाता है। यहां के लोग लंबे समय से पशुओं के इलाज की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हालत में कतई सुधार नहीं हो रहा है। लधिया क्षेत्र के चार हजार से अधिक पशुपालकों के लिए रीठा साहिब और भिंगराड़ा में दो पशुधन प्रसार केंद्र हैं। रीठा साहिब केंद्र तो पिछले साल से ही बगैर कर्मी के हैं, वहीं इस साल फरवरी में पशुधन प्रसार अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से मार्च से भिंगराड़ा का पशु केंद्र भी बंद हो गया।
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नतीजा यह हो रहा है कि मवेशियों के बीमार होने पर क्षेत्र के दो दर्जन गांवों के मवेशियों को इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है। लधिया घाटी में लोग खेती के साथ पशुपालन का काम बहुतायत में करते हैं। शेरनाथ, कुंदन बिष्ट, प्रमोद बोहरा, रवींद्र बोहरा, केशवी देवी सहित तमाम ग्रामीणों ने जल्द से जल्द पशुधन प्रसार केंद्रों में कर्मियों की तैनाती की मांग की है।
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सिर्फ लधिया घाटी ही नहीं जिले के कुल 9 पशु केंद्रों में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। कर्णकरायत, इजड़ा, देवीधुरा, मंच, ओलखढुंगा, बसेड़ी, ज्योश्यूड़ा, चौड़ामेहता व भिंगराड़ा में पशु प्रसार अधिकारी नहीं होने से पशुपालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जिले में फार्मेसिस्टों की भी भारी कमी
चंपावत जिले में भले ही 2.45 लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशुपालन पर आश्रित हैं, मगर यहां पशुपालन विभाग की सेहत ठीक नहीं है। पशुधन प्रसार अधिकारियों की ही कमी नहीं है, जिले के 14 पशु अस्पतालों में से 9 में फार्मेसिस्ट भी नहीं है। यहां तक कि चंपावत का पशु अस्पताल भी बगैर फार्मेसिस्ट के चल रहा है। चंपावत जिले के 14 पशु अस्पतालों को संचालित करने के लिए 15 फार्मेसिस्टों के पद सृजित हैं। लेकिन तैनाती इनमें से महज 6 की है। 8 अस्पतालों (चंपावत राजकीय पशु अस्पताल में दो पद, राजकीय सहायक पशु अस्पताल चंपावत, टनकपुर, नरसिंहडांडा, चमदेवल, बर्दाखान, रेगड़ू व पाटी) में एक भी फार्मेसिस्ट नहीं है।
कोट
लधिया घाटी में रीठा साहिब व भिंगराड़ा के पशुधन प्रसार केंद्र कर्मियों की कमी से बंद है। जिले में इसके अलावा कई अन्य केंद्रों में भी कर्मियों की कमी है। काम चलाने के लिए विभाग इन स्थानों में सचल पशु शिविर लगा राहत पहुंचाने का प्रयास करता है।
डॉ.बीएस जंगपांगी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।