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बर्फीले रास्तों पर छह किमी पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण
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सरकारी सिस्टम की सुस्ती और बर्फबारी ने ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा दी है। दस साल से उर्गम-पल्ला मोटर मार्ग नहीं बनने से ग्रामीण पैदल छह किमी चढ़ाई चढ़कर गांव जा रहे हैं। इन दिनों गांवों के रास्ते पूरी तरह से बर्फ से ढके हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
12 दिसंबर को हुई बर्फबारी के बाद उर्गम पल्ला पैदल मार्ग बर्फ से ढक गया था, जो अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है। लोग जरूरी सामान कंधे पर या घोड़े खच्चर पर लादकर उर्गम से पल्ला गांव ले जा रहे हैं। ग्राम प्रधान पल्ला विमला देवी, ग्रामीण भगत सिंह, महेंद्र सिंह, सैन सिंह, मातबर सिंह, नरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि गांव के लिए 15 किमी सड़क बननी है। सड़क का काम एक दशक से चल रहा है, लेकिन अभी तक सड़क बनकर पूरी नहीं हो पाई है। रविवार को मौसम साफ होने पर लोग बड़ी संख्या में उर्गम पहुंचे और घोड़े खच्चरों पर और खुद कंधे पर सामान लादकर गांव तक पहुंचाया। पहले ही लोगों को पैदल चलना पड़ता है, लेकिन बर्फबारी होने से परेशानी और बढ़ गई है। बर्फबारी ऐसे ही जारी रही तो गांव में खाद्यान संकट गहरा जाएगा।
कोट
सड़क का करीब 800 मीटर हिस्सा अभी मंजूरी के प्रथम चरण में है। इसकी डीपीआर बनाई जा रही है। डीपीआर मंजूर होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इस स्थान पर खड़ी चट्टान है। शेष हिस्से पर अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। - डीएस रावत, अधिशासी अभियंता लोनिवि गोपेश्वर।
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12 दिसंबर को हुई बर्फबारी के बाद उर्गम पल्ला पैदल मार्ग बर्फ से ढक गया था, जो अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है। लोग जरूरी सामान कंधे पर या घोड़े खच्चर पर लादकर उर्गम से पल्ला गांव ले जा रहे हैं। ग्राम प्रधान पल्ला विमला देवी, ग्रामीण भगत सिंह, महेंद्र सिंह, सैन सिंह, मातबर सिंह, नरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि गांव के लिए 15 किमी सड़क बननी है। सड़क का काम एक दशक से चल रहा है, लेकिन अभी तक सड़क बनकर पूरी नहीं हो पाई है। रविवार को मौसम साफ होने पर लोग बड़ी संख्या में उर्गम पहुंचे और घोड़े खच्चरों पर और खुद कंधे पर सामान लादकर गांव तक पहुंचाया। पहले ही लोगों को पैदल चलना पड़ता है, लेकिन बर्फबारी होने से परेशानी और बढ़ गई है। बर्फबारी ऐसे ही जारी रही तो गांव में खाद्यान संकट गहरा जाएगा।
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सड़क का करीब 800 मीटर हिस्सा अभी मंजूरी के प्रथम चरण में है। इसकी डीपीआर बनाई जा रही है। डीपीआर मंजूर होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इस स्थान पर खड़ी चट्टान है। शेष हिस्से पर अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। - डीएस रावत, अधिशासी अभियंता लोनिवि गोपेश्वर।
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