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Chamoli News: भूस्खलन और कटाव से सहमे ग्रामीण
Sat, 01 Aug 2026 05:46 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 01 Aug 2026 05:46 PM IST
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राड़ीगांव के 28 परिवार खतरे की जद में, तत्काल विस्थापन की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। तहसील मुख्यालय राड़ीबगड़ से 200 मीटर दूर बसे राड़ीगांव के 28 परिवार खतरे की जद में हैं। पिछले साल हुए भूस्खलन और घांघली गदेरे के कटाव से गांव के मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण 15 जून से रात में बारिश के कारण सो नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों ने तत्काल विस्थापन की मांग की।
22 अगस्त 2025 को अतिवृष्टि और बादल फटने से थराली-कुराड़ मार्ग पर भूस्खलन हुआ। इसका मलबा घांघली गदेरे से राड़ीगांव पहुंचा जिससे मकानों के नीचे कटाव हुआ। लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। दो महीने कुलसारी राहत शिविर में रहने के बाद ग्रामीण लौटे। उन्हें सुरक्षा दीवार बनने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब फिर भारी बारिश से घांघली गदेरे का उफान जारी है। इससे बची-खुची जमीन भी बह रही है। प्रभावित जगदीश पंत, दिनेश पंत और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को अतिशीघ्र उनका विस्थापन करना चाहिए। उनके पास जमीन, गोशालाएं और शौचालय नहीं बचे हैं। मकान हवा में लटके हैं और रात को हिलते हैं। तहसीलदार अक्षय पंकज ने बताया कि राड़ीगांव और राड़ीबगड़ के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से जवाब आने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। तहसील मुख्यालय राड़ीबगड़ से 200 मीटर दूर बसे राड़ीगांव के 28 परिवार खतरे की जद में हैं। पिछले साल हुए भूस्खलन और घांघली गदेरे के कटाव से गांव के मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण 15 जून से रात में बारिश के कारण सो नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों ने तत्काल विस्थापन की मांग की।
22 अगस्त 2025 को अतिवृष्टि और बादल फटने से थराली-कुराड़ मार्ग पर भूस्खलन हुआ। इसका मलबा घांघली गदेरे से राड़ीगांव पहुंचा जिससे मकानों के नीचे कटाव हुआ। लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। दो महीने कुलसारी राहत शिविर में रहने के बाद ग्रामीण लौटे। उन्हें सुरक्षा दीवार बनने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब फिर भारी बारिश से घांघली गदेरे का उफान जारी है। इससे बची-खुची जमीन भी बह रही है। प्रभावित जगदीश पंत, दिनेश पंत और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को अतिशीघ्र उनका विस्थापन करना चाहिए। उनके पास जमीन, गोशालाएं और शौचालय नहीं बचे हैं। मकान हवा में लटके हैं और रात को हिलते हैं। तहसीलदार अक्षय पंकज ने बताया कि राड़ीगांव और राड़ीबगड़ के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से जवाब आने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
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