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युवाओं ने श्रमदान कर खोला भूस्खलन से बंद पड़ा पैदल मार्ग
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प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद भी जब पैदल रास्ता नहीं खोला गया तो युवाओं ने मदद मांगने की बजाय खुद श्रमदान कर गांव के पैदल रास्ते को आवाजाही के लिए खोल दिया। पिछले एक माह से भूस्खलन से मार्ग बंद पड़ा था जिससे ग्रामीण करीब दो किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर गंतव्य को जा रहे थे। छात्र-छात्राओं को स्कूल जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। यह देख युवाओं ने कुदाल, फावड़े उठाए और एक ही दिन में 100 मीटर पैदल रास्ते का सुधारीकरण कार्य कर दिया।
दशोली ब्लॉक खंड के मेड-ठेली गांव का मुख्य पैदल मार्ग डीप तोक में 18 जुलाई को भारी बारिश के दौरान भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया था जिससे ग्रामीणों को पैदल आवाजाही में दिक्कतें झेलनी पड़ रही थीं। पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र रावत ने बताया कि ब्लॉक के साथ ही जिला प्रशासन से रास्ते के सुधारीकरण की मांग की गई। आश्वासन तो मिला लेकिन रास्ते का सुधारीकरण शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों की दिक्कत को देखते हुए गांव के युवाओं ने एक बैठक कर श्रमदान कर रास्ते का सुधारीकरण कार्य करने का निर्णय लिया। रविवार को सुबह आठ बजे युवाओं ने श्रमदान शुरू किया और अपराह्न चार बजे तक 100 मीटर रास्ते का सुधारीकरण कार्य कर लिया।
पूर्व प्रधान सुरेंद्र रावत ने बताया कि गांव-गांव में सड़क पहुंचने से अब प्रशासन पैदल मार्गों के रख-रखाव पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है जबकि बरसात में सड़कें बंद होने पर यही रास्ते आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। युवा धनवीर सिंह, बलवीर सिंह, जसपाल सिंह, किशोर सिंह, राकेश, प्रदीप, संतोष आदि ने श्रमदान कर रास्ते को सुचारु किया।
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जिला प्रशासन से पुल निर्माण, रास्ता व सड़क सुधारीकरण के लिए आपदा मद में धनराशि मुहैया कराई जाती है। प्रशासन की ओर से 10 लाख तक के कार्य करवाए जा सकते हैं। आपदा से क्षतिग्रस्त रास्तों व पुलिया सुधारीकरण के प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। - हिमांशु खुराना, डीएम, चमोली।
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दशोली ब्लॉक खंड के मेड-ठेली गांव का मुख्य पैदल मार्ग डीप तोक में 18 जुलाई को भारी बारिश के दौरान भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया था जिससे ग्रामीणों को पैदल आवाजाही में दिक्कतें झेलनी पड़ रही थीं। पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र रावत ने बताया कि ब्लॉक के साथ ही जिला प्रशासन से रास्ते के सुधारीकरण की मांग की गई। आश्वासन तो मिला लेकिन रास्ते का सुधारीकरण शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों की दिक्कत को देखते हुए गांव के युवाओं ने एक बैठक कर श्रमदान कर रास्ते का सुधारीकरण कार्य करने का निर्णय लिया। रविवार को सुबह आठ बजे युवाओं ने श्रमदान शुरू किया और अपराह्न चार बजे तक 100 मीटर रास्ते का सुधारीकरण कार्य कर लिया।
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पूर्व प्रधान सुरेंद्र रावत ने बताया कि गांव-गांव में सड़क पहुंचने से अब प्रशासन पैदल मार्गों के रख-रखाव पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है जबकि बरसात में सड़कें बंद होने पर यही रास्ते आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। युवा धनवीर सिंह, बलवीर सिंह, जसपाल सिंह, किशोर सिंह, राकेश, प्रदीप, संतोष आदि ने श्रमदान कर रास्ते को सुचारु किया।
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जिला प्रशासन से पुल निर्माण, रास्ता व सड़क सुधारीकरण के लिए आपदा मद में धनराशि मुहैया कराई जाती है। प्रशासन की ओर से 10 लाख तक के कार्य करवाए जा सकते हैं। आपदा से क्षतिग्रस्त रास्तों व पुलिया सुधारीकरण के प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। - हिमांशु खुराना, डीएम, चमोली।