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Chamoli News: गोपीनाथ मंदिर के शिखर की कैनोपी बदलने का काम हुआ शुरू
Sat, 07 Jun 2025 11:32 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:32 PM IST
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पुरातत्व विभाग की ओर से मंदिर के शीर्ष भाग में लगाई जा रही कॉपर सीट और नक्काशीदार लकड़ी
बरसात में मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है पानी, श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
गोपेश्वर। पुरातत्व विभाग की ओर से प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर के शिखर भाग की कैनोपी को बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। मंदिर के शीर्ष में लगी पुरानी कॉपर सीट को उतारा जा रहा है। साथ ही लकड़ी के जीर्णशीर्ण हो चुके पिलरों को भी हटाया गया है। यहां नई कैनोपी स्थापित की जाएगी।
गोपीनाथ मंदिर की ऊंचाई 52 फीट है, जो उत्तराखंड का सबसे ऊंचा प्राचीन मंदिर है। मंदिर के शीर्ष भाग में कैनोपी जीर्णशीर्ण होने के कारण बरसात में पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है। सावन माह में बारिश होने पर मंदिर में पानी आने से श्रद्धालुओं को दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से मंदिर के शीर्ष भाग का सुधारीकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक आशीष सेमवाल ने बताया कि गोपीनाथ मंदिर की कैनोपी को 1996 में बदला गया था, अब यह जीर्णशीर्ण हो गई है। इसमें कॉपर की नई सीट लगाई जा रही है, जबकि नक्काशीदार लकड़ियां भी लगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष मंदिर के मध्यभाग की कैनोपी को भी बदलकर यहां नई कैनोपी लगाई गई।
बरसात में मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है पानी, श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
गोपेश्वर। पुरातत्व विभाग की ओर से प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर के शिखर भाग की कैनोपी को बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। मंदिर के शीर्ष में लगी पुरानी कॉपर सीट को उतारा जा रहा है। साथ ही लकड़ी के जीर्णशीर्ण हो चुके पिलरों को भी हटाया गया है। यहां नई कैनोपी स्थापित की जाएगी।
गोपीनाथ मंदिर की ऊंचाई 52 फीट है, जो उत्तराखंड का सबसे ऊंचा प्राचीन मंदिर है। मंदिर के शीर्ष भाग में कैनोपी जीर्णशीर्ण होने के कारण बरसात में पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है। सावन माह में बारिश होने पर मंदिर में पानी आने से श्रद्धालुओं को दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से मंदिर के शीर्ष भाग का सुधारीकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक आशीष सेमवाल ने बताया कि गोपीनाथ मंदिर की कैनोपी को 1996 में बदला गया था, अब यह जीर्णशीर्ण हो गई है। इसमें कॉपर की नई सीट लगाई जा रही है, जबकि नक्काशीदार लकड़ियां भी लगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष मंदिर के मध्यभाग की कैनोपी को भी बदलकर यहां नई कैनोपी लगाई गई।
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