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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Spade, shovel been building the canal, rural

कुदाल, फावड़े लेकर नहर निर्माण में जुटे ग्रामीण

Wed, 02 Nov 2016 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर) Updated Wed, 02 Nov 2016 10:08 PM IST
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पुरसाड़ी गांव में तीन साल से क्षतिग्रस्त पड़ी सिंचाई नहर की जब सिंचाई विभाग और प्रशासन ने सुध नहीं ली तो ग्रामीण खुद ही कुदाल, फावड़े निकाल कर नहर के निर्माण में जुट गए। ग्रामीणों ने कहा है कि डेढ़ किमी लंबी नहर को वह स्वयं ही दुरुस्त करेंगे।

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चमोली जिले का पुरसाड़ी गांव सब्जी और नकदी फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए जाना जाता है। वर्ष 2013 की आपदा से पुरसाड़ी सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से ग्रामीण सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन से नहर के सुधारीकरण की गुहार लगा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने ग्रामीणों की नहीं सुनी।
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बुधवार को पुरसाड़ी गांव की पूर्व प्रधान राजेश्वरी देवी की अगुवाई में ग्रामीणों ने नहर निर्माण के लिए गांव में एक बैठक की। तय किया गया कि अब ग्रामीण स्वयं ही एकजुट होकर नहर का सुधारीकरण कार्य शुरू करेंगे। इसके बाद बुधवार से ग्रामीणों ने पुरसाड़ी गदेरे से नहर का सुधारीकरण कार्य शुरू कर दिया। पूर्व प्रधान राजेश्वरी देवी, कुशलानंद, विसेश्वर प्रसाद, सुलोचना देवी, प्रेमा देवी और रुकमणी देवी का कहना है कि गांव में सब्जी और नकदी फसलों के उत्पादन से ही वह अपनी आजीविका चलाते हैं,  सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद सब्जी और फसलों का उत्पादन कम हो गया।
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जब प्रशासन ने नहर का सुधारीकरण कार्य नहीं करवाया तो ग्रामीणों ने स्वयं ही यह बीड़ा उठाया है।

दैवी आपदा मद में लघु सिंचाई विभाग को नहर सुधारीकरण कार्य के लिए डेढ़ लाख की धनराशि आवंटित की जाती है, जो बेहद कम है। पुरसाड़ी नहर के सुधारीकरण कार्य के लिए करीब पंद्रह लाख की धनराशि चाहिए।
- वीडी बेंजवाल, ईई, लघु सिंचाई, चमोली।

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