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गाड़ी और कुजौ मैकोट गांव में स्यालपाती कौथिग संपन्न
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गोपेश्वर के समीप कुजों-मेकोट गांव में स्यालपाती मेले में उमड़े श्रद्घालु।
- फोटो : GOPESHWAR
चमोली के गाड़ी और कुजौ मैकोट गांव में नंदा लोकजात के तहत आयोजित स्यालपाती कौथिग का पौराणिक रीति रिवाज और मां नंदा के जागरों के साथ समापन हो गया। इसके साथ ही इस साल की नंदा लोकजात भी विधिवत संपन्न हो गई है।
नंदा लोकजात के तहत गाड़ी गांव से एक सप्ताह पहले ग्रामीण मां नंदा की डोली लेकर बालपाटा जाते हैं जबकि कुजौ मैकोट के ग्रामीण नंदी कुंड पहुंचते हैं। वहां ग्रामीण शृंगार का सामान और समौण लेकर मां नंदा को कैलाश के लिए विदा करते हैं। लौटते समय ग्रामीण ब्रह्म कमल के साथ मां नंदा की छतोली गांव में लेकर आते हैं। छतोली के गांव में पहुंचने पर स्यालपाती कौथिग का आयोजन किया जाता है। ग्रामीण मां नंदा की छतोली के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। छतोली के मंदिर में विराजमान होने पर वहां पर ढोल दमाऊं के साथ जागर गीत गाए जाते हैं। इसमें विभिन्न देवताओं के पश्वा नृत्य करते हैं। गाड़ी गांव में पंचायती चौक में पश्वों ने स्नान के बाद नृत्य कर शक्ति प्रदर्शन भी किया। जबकि कुजौ मैकोट में चंडिका मंदिर में विभिन्न गांवों से आए मां नंदा के पश्वों ने नृत्य कर शक्ति प्रदर्शन कर भक्तों को आशीर्वाद दिया।
गाड़ी गांव में नंदा कौथिग में सैंजी, ब्यारा, निजमुला, बिरही आदि गांव के लोग पहुंचे थे। इस अवसर पर मातवार सिंह, कुंवर सिंह, जगदीश, हिम्मत सिंह, नंदन सिंह, मदन सिंह, अनुसूया सिंह, आनंद सिंह, गंगा सिंह, चरण सिंह, नेतर सिंह आदि मौजूद थे। वहीं कुजौ मैकोट में देवर खडोरा, सगर, ग्वाड़, देवलधार, नैल कुड़ाव, डुंगरी, डुमक-कलगोठ, बेमरूमठ, हाट-जैसाल, छिनका, बौंला, कौंज-पोथनी आदि के गांव के ग्रामीण शामिल हुए।
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नंदा लोकजात के तहत गाड़ी गांव से एक सप्ताह पहले ग्रामीण मां नंदा की डोली लेकर बालपाटा जाते हैं जबकि कुजौ मैकोट के ग्रामीण नंदी कुंड पहुंचते हैं। वहां ग्रामीण शृंगार का सामान और समौण लेकर मां नंदा को कैलाश के लिए विदा करते हैं। लौटते समय ग्रामीण ब्रह्म कमल के साथ मां नंदा की छतोली गांव में लेकर आते हैं। छतोली के गांव में पहुंचने पर स्यालपाती कौथिग का आयोजन किया जाता है। ग्रामीण मां नंदा की छतोली के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। छतोली के मंदिर में विराजमान होने पर वहां पर ढोल दमाऊं के साथ जागर गीत गाए जाते हैं। इसमें विभिन्न देवताओं के पश्वा नृत्य करते हैं। गाड़ी गांव में पंचायती चौक में पश्वों ने स्नान के बाद नृत्य कर शक्ति प्रदर्शन भी किया। जबकि कुजौ मैकोट में चंडिका मंदिर में विभिन्न गांवों से आए मां नंदा के पश्वों ने नृत्य कर शक्ति प्रदर्शन कर भक्तों को आशीर्वाद दिया।
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गाड़ी गांव में नंदा कौथिग में सैंजी, ब्यारा, निजमुला, बिरही आदि गांव के लोग पहुंचे थे। इस अवसर पर मातवार सिंह, कुंवर सिंह, जगदीश, हिम्मत सिंह, नंदन सिंह, मदन सिंह, अनुसूया सिंह, आनंद सिंह, गंगा सिंह, चरण सिंह, नेतर सिंह आदि मौजूद थे। वहीं कुजौ मैकोट में देवर खडोरा, सगर, ग्वाड़, देवलधार, नैल कुड़ाव, डुंगरी, डुमक-कलगोठ, बेमरूमठ, हाट-जैसाल, छिनका, बौंला, कौंज-पोथनी आदि के गांव के ग्रामीण शामिल हुए।
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