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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Rosemary is made ??out of the robust economy

आर्थिकी का मजबूत जरिया बन रही रोजमैरी

Sun, 24 Jan 2016 10:06 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला
ब्यूरो/ अमर उजाला Updated Sun, 24 Jan 2016 10:06 PM IST
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औषधीय पौधा रोजमैरी को चमोली की आबोहवा खूब रास आ रही है।
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जोशीमठ ब्लॉक के ग्राम पंचायत परसारी, मेरग, लाता, सुभाईं और सलधार गांवों के काश्तकार परंपरागत खेती के साथ ही रोजमैरी का उत्पादन कर रहे हैं।

तैयार उत्पाद को जैविक उत्पाद परिषद काश्तकारों के माध्यम से ही विपणन की व्यवस्था करा रहा है। एक नाली भूमि में नकदी फसलों से किसान सालाना 50 हजार कमाते थे उसी खेत से अब किसान रोजमैरी का उत्पादन कर 25 अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।

वर्ष 2014 से गढ़वाल केंद्रीय विवि के वानिकी विभाग की ओर से भी डीबीटी (डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी) परियोजना के तहत  परसारी और मैरग गांवों में करीब एक हेक्टेयर भू-भाग पर रोजमैरी का उत्पादन किया जा रहा है।
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 वानिकी विभाग के अनुवेषक डा.  अजीत नेगी की ओर से काश्तकारों को समय-समय पर रोजमैरी के कृषिकरण और इसकी उपयोगिता के बारे में भी टिप्स दिए जा रहे हैं।
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वर्ष 2006 से जोशीमठ के मेरग गांव निवासी उमराव सिंह रोजमैरी का उत्पादन कर रहे हैं। उनका कहना है कि रोजमैरी के कृषिकरण से कम मेहनत में अच्छी आय प्राप्त होती है।

 रोजमैरी के कृषिकरण के लिए एक बार लगाई गई पौध से करीब 8 से 10 वर्षों तक फसल ली जा सकती है।

इंसेट
रोजमैरी के फायदे
भूमध्यसागरीय क्षेत्र में होने वाले पुदीना कुल के रोजमैरी के उत्पादों का उपयोग जहां सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री बनाने में होता है

 वहीं, रोजमैरी की सूखी पत्तियां जैम, पेय पदार्थों, सब्जियों, मीट व मछली में खुशबू के लिए मसाले बनाने के प्रयोग में लाई जाती है।

 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रोजमैरी की सूखी पत्तियों के दाम करीब 350 रुपये प्रतिकिलो है, वहीं रोजमैरी से निकलने वाले तेल का बाजार भाव करीब 3500 से 4000 रुपये लीटर तक है।


रोजमैरी पौधे को किसी भी जलवायु में उगाया जा सकता है।

पौधे के उत्पादों से मुख्य रूप से हाई क्वालिटी परफ्यूम व मसाले बनाए जाते हैं। उच्च हिमालयी जलवायु में उगने वाले पौधे की गुणवत्ता उच्च स्तर की होती है। - डा. विजय प्रसाद भट्ट, वैज्ञानिक, जड़ी-बूटी शोध संस्थान, चमोली।
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