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निजमुला घाटी में इस बार कम हुआ आलू का उत्पादन
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चमोली जिले की निजमुला घाटी आलू उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस साल यहां आलू की फसल का उत्पादन काफी कम रहा है। काश्तकार अत्यधिक और बेमौसम बारिश को इसका कारण मान रहे हैं।
चमोली जिले की निजमुला घाटी का आलू काफी पसंद किया जाता है और यहां घाटी के ईराणी, पाणा, झींझी, दुर्मी, पगना, गौंणा, धारकुमाला, तड़ागताल, मोली मनुरा, हडुंग, सैंजी सहित अन्य गांवों में आलू का उत्पादन बेहतर होता है, लेकिन इस साल अधिक बारिश होने से आलू की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईराणी के प्रधान और काश्तकार मोहन नेगी, सुलभ सिंह, नत्थी सिंह, पाणा के हिम्मत सिंह, झींझी के भजन सिंह, तड़ागताल के गुमान सिंह आदि का कहना है कि आलू की फसल इस साल आधी रह गई है। ज्यादातर आलू मिट्टी के अंदर ही सड़ गया है। जो भी आलू गांवों में निकाला जा रहा है वह अभी घरों में डंप है। यातायात के सुलभ साधन नहीं होने से लोग आलू को लोकल बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि घाटी का आलू कुमाऊं और देहरादून के जौनसार-बावर तक जाता है। व्यापारी गांव में आकर आलू खरीदते हैं। नवंबर में इसकी खरीद शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल आलू का उत्पादन कम होने से काश्तकार परेशान हैं।
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चमोली जिले की निजमुला घाटी का आलू काफी पसंद किया जाता है और यहां घाटी के ईराणी, पाणा, झींझी, दुर्मी, पगना, गौंणा, धारकुमाला, तड़ागताल, मोली मनुरा, हडुंग, सैंजी सहित अन्य गांवों में आलू का उत्पादन बेहतर होता है, लेकिन इस साल अधिक बारिश होने से आलू की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईराणी के प्रधान और काश्तकार मोहन नेगी, सुलभ सिंह, नत्थी सिंह, पाणा के हिम्मत सिंह, झींझी के भजन सिंह, तड़ागताल के गुमान सिंह आदि का कहना है कि आलू की फसल इस साल आधी रह गई है। ज्यादातर आलू मिट्टी के अंदर ही सड़ गया है। जो भी आलू गांवों में निकाला जा रहा है वह अभी घरों में डंप है। यातायात के सुलभ साधन नहीं होने से लोग आलू को लोकल बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि घाटी का आलू कुमाऊं और देहरादून के जौनसार-बावर तक जाता है। व्यापारी गांव में आकर आलू खरीदते हैं। नवंबर में इसकी खरीद शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल आलू का उत्पादन कम होने से काश्तकार परेशान हैं।
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