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आपदा को याद करते ही सिहर उठते हैं लोग

Mon, 15 Jun 2020 10:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2020 10:24 PM IST
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People are scared as soon as they remember the disaster
कर्णप्रयाग में 2013 की आपदा में गंगा माता मंदिर परिसर तक भर गया था पानी-फाइल फोटो। - फोटो : KARNPRYAG
रमेश चंद्र जोशी
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थराली। जून, 2013 में आई आपदा की याद से आज भी लोग सिहर उठते हैं। उस दौरान हुई भारी बारिश और बाढ़ का मंजर आज भी थराली और आस-पास के क्षेत्रों के लोगों की आंखों में तैरता है। तहसील मुख्यालय राड़ीबगड़ से थराली बाजार तक दो किलोमीटर सड़क पूरी तरह से पिंडर नदी में समा गई थी। नदी के किनारे बने अधिकतर भवन एवं दुकानें भी बाढ़ में बह गए थे।
16 जून की सुबह लोगों की आंख खुली तो मंजर भयावह था। पूरी पिडंर घाटी को जोड़ने वाले थराली बाजार के मुख्य पुल सहित पांच झूला पुल भी इस बाढ़ में समा गये थे। थराली और देवाल का संपर्क देश दुनिया से पूरी तरह से कट गया था। किसी तरह से यहां के ग्रामीणों को हल्द्वानी से नंदकेशरी पुल के रास्ते खाद्य सामग्री मुहैया कराई गई थी।
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लगभग 15 करोड़ से अधिक की लागत से राड़ीबगड़ थराली सड़क ठीक की गई। 20 लाख से अधिक की लागत से थराली पुल की मरम्मत की गई और लगभग छह करोड़ से अधिक की लागत से पांच झूला पुलों का निर्माण भी किया गया। थराली के देवराड़ा गांव के लिए दस करोड़ से अधिक की धनराशि से पिंडर नदी के दोनों तरफ दीवारों का निर्माण किया गया। हालांकि देवराड़ा गांव के हर परिवार को विस्थापन और भवन निर्माण के लिए सरकार ने पहले ही सात-सात लाख रूपये का मुआवजा दे दिया था। आपदा के निशान जगहों से तो मिटे, लेकिन लोगों के दिल-ओ-दिमाग में उसके निशान अब भी चस्पा हैं।
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