राज्य को उसकी विशिष्टता के आधार पर तैयार उत्पाद पर जीआई टैग प्रदान किया जाता है। इसके तहत तेजपत्ता को उत्तराखंड राज्य के जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडीकेशन) की मान्यता मिली है। यह मान्यता मिलने से अब तेजपत्ता उत्तराखंड की पहचान बनेगा। साथ ही तेजपत्ता का उत्पादन बढ़ेगा और इसकी डिमांड भी बढ़ जाएगी। मंगलवार को प्रधान डाकघर गोपेश्वर में उत्तराखंड तेजपत्ता पर एक विशेष लिफाफे का जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान गोपेश्वर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विजय भट्ट ने विमोचन किया।
प्रधान डाकघर में आयोजित समारोह में वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विजय भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में मौजूदा समय में तेजपत्ता के 10 हजार काश्तकार पंजीकृत हैं, जो वर्षभर में सात से 10 क्विंटल तेजपत्ता का उत्पादन करते हैं। इससे राज्य को 3 से 4 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त होता है। कहा कि उत्तराखंड तेजपत्ता समिति की ओर से पिछले छह माह से तेजपत्ता के जीआई टैग की प्रक्रिया की जा रही थी। अब उत्तराखंड तेजपत्ता को जीआई टैग प्राप्त होने पर तेजपत्ता का उत्पादन बढ़ेगा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजपत्ते की डिमांड भी बढ़ जाएगी। डाक अधीक्षक जीडी आर्य ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर तेजपत्ता पर विशेष डाक लिफाफा जारी किया गया है। इससे उत्तराखंड के औषधीय पादपों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर सहायक डाक अधीक्षक बीपी थपलियाल, डाकघर निरीक्षक हेमंत यादव, अजय कुमार, रुद्रप्रयाग के डाक निरीक्षक महेश प्रसाद, रोहित कुमार, कुलदीप सिंह और परिमंडलीय कार्यालय देहरादून के प्रतिनिधि शूरवीर सिंह तोमर आदि मौजूद थे।