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बारहमासी पर्यटन की संभावनाएं हैं मौजूद

Mon, 08 Jul 2019 10:36 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 10:36 PM IST
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no arrangement for pilgrims
आदिबदरी। बारहमासी पर्यटन की संभावनाओं को समेटे आदिबदरी क्षेत्र में सरकारों की उपेक्षा के कारण यहां मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हुई हैं। यहां पर्यटक तो आते हैं लेकिन उनके ठहरने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।
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आदिगुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित आदिबदरी मंदिर समूह गढ़वाल मंडल का सबसे बड़ा मंदिर है। आदिबदरी से तीन किमी की दूरी पर चांदपुर गढ़ी का किला है। चांदपुर गढ़ी और आदिबदरी मंदिर समूह चमोली जिले के लिए पर्यटन स्थल साबित हो सकते हैं, लेकिन सरकार व जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना है। स्थानीय मदन नेगी ने बताया कि आदिबदरी में पर्यटक और यात्री आते हैं लेकिन यहां यात्रियों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था, प्रतीक्षालय, सार्वजनिक शौचालय और वाहनों की पार्किंग तक नहीं है। क्षेत्र के गांव नौना, छिमटा, चोरडा, डोल्टू, बेड़ी गांव के ग्रामीणों को सड़क के अभाव में मीलों पैदल चलना पड़ता है। आदिबदरी तहसील एक नाइजर के भरोसे पटवारी चौकी की एक कोठरी पर संचालित हो रही है। यहां न तो अस्पताल है न ही युवाओं के खेलने के लिए खेल मैदान है।
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कोट
आदिबदरी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए शासन ने दो करोड़ की कार्ययोजना तैयार की है। सड़क विहीन गांवों को अगले साल सड़क से जोड़ दिया जाएगा। भलसों गांव के लिए पानी का स्रोत खोजकर नई योजना बनाई जाएगी। - सुरेंद्र सिंह नेगी, विधायक कर्णप्रयाग।
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आदिबदरी का ऐतिहासिक बंगला बना अस्तबल
आदिबदरी। सन् 1902 में बना आदिबदरी का ऐतिहासिक बंगला देखरेख के अभाव में टूटने के कगार पर है। बंगले के चारों ओर गाजर घास जमी है और लोगों ने इसे अस्तबल बना दिया है। क्षेत्र के लागों ने इस ऐतिहासिक बंगले के मरम्मत की मांग उठाई।

सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह चाकर ने बताया कि आदिबदरी में बने इस बंगले पर अंग्रेजों के शासन काल में अंग्रेज कमीश्नर रहा करते थे। यूपी के राज्यपाल अकबर अली खान को 1973 में इसी बंगले में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था, लेकिन आज यही बंगला शासन और प्रशासन की उपेक्षा के कारण अस्तबल में तब्दील हो गया है। लोग यहां अपने घोड़ों को बांध रहे हैं। बंगले के टिन, पत्थर और रेलिंग गायब हो गए हैं और बंगले को जाने वाली सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई है। आदिबदरी मंदिर समिति के महासचिव गैणा सिंह रावत ने बताया कि वे कई बार इस ऐतिहासिक बंगले के जीर्णोद्धार के लिए अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो रही है। जसवंत भंडारी और स्थानीय लोगों ने बंगले का जीर्णोद्धार कर पर्यटकों के यहां रुकने और वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बनाने की मांग उठाई। विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि जल्द इस संबंध में सीएम को पत्र लिखा है।
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