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नौठा कौथिग : नहीं हुआ लाठी डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध
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कोराना वायरस के संक्रमणकाल में नौठा कौथिग के तहत पहली बार लाठी डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध नहीं हुआ। सिर्फ भगवान आदिबदरीनाथ को नए अनाज का भोग चढ़ाया गया। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने भगवान की पूजा कर देशवासियों के लिए खुशहाली की कामना की।
प्रत्येक साल बैसाख महीने के पांचवें सोमवार को नौठा कौथिग मनाया जाता है। इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण 11 से 13 मई तक होने वाले मेले को स्थगित करना पड़ा। सोमवार को सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया गया और भगवान आदिबदरी नाथ की नौठा पूजा कर परंपरानुसार खेती के मालगुजार गुलाब सिंह पंवार ने नया अनाज चढ़ाया। परंपरा के अनुसार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विनोद नेगी ने उनको तलवार भेंट की। भगवान को नया अनाज अर्पित करने के बाद विश्व को कारोना से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गई। मंदिर के पुजारी चक्रधर थपलियाल ने कहा कि तहसील प्रशासन से केवल पांच लोगों को ही इस आयोजन में शामिल होने की अनुमति मिली थी। पहली बार बिना गाजे-बाजे व नौठा नृत्य के पूजा करनी पड़ी। इस मौके पर महासचिव गैंणा सिंह, नरेंद्र चाकर, नरेश बरमोला मौजूद थे।
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प्रत्येक साल बैसाख महीने के पांचवें सोमवार को नौठा कौथिग मनाया जाता है। इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण 11 से 13 मई तक होने वाले मेले को स्थगित करना पड़ा। सोमवार को सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया गया और भगवान आदिबदरी नाथ की नौठा पूजा कर परंपरानुसार खेती के मालगुजार गुलाब सिंह पंवार ने नया अनाज चढ़ाया। परंपरा के अनुसार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विनोद नेगी ने उनको तलवार भेंट की। भगवान को नया अनाज अर्पित करने के बाद विश्व को कारोना से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गई। मंदिर के पुजारी चक्रधर थपलियाल ने कहा कि तहसील प्रशासन से केवल पांच लोगों को ही इस आयोजन में शामिल होने की अनुमति मिली थी। पहली बार बिना गाजे-बाजे व नौठा नृत्य के पूजा करनी पड़ी। इस मौके पर महासचिव गैंणा सिंह, नरेंद्र चाकर, नरेश बरमोला मौजूद थे।
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