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किरूली से कैलाश रवाना हुईं मां नंदा की छंतोलियां
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चमोली के गाड़ी गांव में कैलाश के लिए विदा होती मां नंदा की छंतोली।
- फोटो : GOPESHWAR
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बंड भूम्याल देवता की अगुवाई में शनिवार को छह गांवों नौरख, पीपलकोटी, कम्यार, लुहां, दिगोली और कुरुड़ की मां नंदा की छंतोलियां बंड क्षेत्र के किरूली में इकट्ठा हुईं। इस दौरान भक्तों ने लोकगीत और जागरों के साथ छंतोलियों को कैलाश के लिए रवाना किया। मां नंदा के साथ बंड क्षेत्र के गेदाणू देवता की छंतोली भी यात्रा में शामिल हुई। देर शाम को मां नंदा की छंतोलियां पहले पड़ाव निजमुला घाटी के गौणा गांव पहुंची।
गौणा गांव पहुंचने पर सैकड़ों भक्तों ने मां नंदा की छंतोलियां का फूल-मालाओं से स्वागत किया। छंतोलियाें को समौण के रूप में भक्तों ने खाजा, चूड़ा, बिंदी, चूड़ी सहित ककड़ी, मुंगरी (मक्का) भेंट किया गया। वहीं नंदा के सिद्धपीठ कुरूड़ से राजराजेश्वरी देवी की छंतोली भी बंड क्षेत्र पहुंची थीं। जहां अन्य छंतोलियों के साथ मां राजराजेश्वरी भी कैलाश के लिए रवाना हुईं। वहीं जोशीमठ के पैनखंडा क्षेत्र में नंदा देवी व स्वनुल देवी जात कार्यक्रम शुक्रवार से शुरू हो गया है। रविवार को उर्गम घाटी के विभिन्न गांवों से मां नंदा की छंतोलियां कैलाश के लिए रवाना होंगी। पैनखंड क्षेत्र में 17 सितंबर तक नंदा लोकजात यात्रा कार्यक्रम होगा। वहीं, 14 सितंबर को बदरीनाथ के बामणी गांव में नंदा अष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इधर, निजमुला घाटी के गाड़ी गांव से शनिवार को मां नंदा की छंतोली सैंजी, मोली, मानुरा होते हुए रात्रि विश्राम को हडुंग पहुंची। 12 सितंबर को छंतोली हडुंग से रामणी पहुंचेगी।
वाण गांव पहुंची मां नंदा की डोली
देवाल। नंदा की डोली व लोकजात यात्रा के लोहाजंग पहुंचने पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डोली के दर्शन किए। लोहाजंग में पूजा-अर्चना के बाद डोली आबादी क्षेत्र के अंतिम गांव वाण पहुंची। रविवार को मां नंदा की डोली व लोकजात यात्रा लाटू देवता की अगुवाई में वाण से निर्जन पड़ाव गैरोली पातल में प्रवास करेगी।
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शनिवार की सुबह पूूजा-अर्चना के बाद मुंदोली के ग्रामीणों ने डोली को दोपहर एक बजे लोहाजंग के चबूतरे पर पहुंचाया। यहां श्रद्धालुओं ने डोली के दूर से ही दर्शन किए। इसके बाद हंस फाउंडेशन और यूथ कांग्रेस की ओर से भंडारे का आयोजन भी किया गया। अपराह्न तीन बजे डोली ने वाण गांव के लिए प्रस्थान किया। वाण पहुंचने पर मां नंदा का श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। रविवार की सुबह नंदा की डोली लाटू देवता की अगुवाई में गैरोली पातल के लिए प्रस्थान करेगी। इस मौके पर हंस फाउंडेशन के बीरू जोशी, ब्लॉक प्रमुख दर्शन दानू, पूर्व विधायक डा. जीतराम, महाबीर बिष्ट, इंद्र राणा, देवी जोशी, गोविंद पांगती, बलबीर घुनियाल आदि शामिल रहे। संवाद
जागरों के बीच नंदा महोत्सव का आगाज
नारायणबगड़ के गांवों में सेवापाती उत्सव का आयोजन शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणबगड़। नंदा देवी लोकजात यात्रा के कैलाश की ओर बढ़ने के साथ ही क्षेत्र के गांवों में नंदा देवी सेवापाती उत्सवों का आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को लोदला, सिलोडी, झिंझोंणी, बूंगा, किमोली तथा नंदा देवी अन्नपूर्णा मठ पैतोली में नंदा जागरों के बीच नंदा महोत्सव का आगाज हुआ। पांच दिनों तक चलने वाले नंदा महोत्सव का समापन मां नंदा की कैलाश विदाई के साथ होगा।
शनिवार को बाजे-गाजों के साथ डुंगरी गांव से भूमियाल देवता के निशाण नंदा धाम अन्नपूर्णा मठ पैतोली पहुंचे। महिलाओं ने अक्षत व पुष्प वर्षा कर भूमियाल देवता की अगवानी की और मांगल गीतों से देवता की स्तुति की। इसी तरह अंय गांवों में भी पूजा अर्चना के साथ मां नंदादेवी सेवापाती उत्सव शुरू हुआ। गांव की ध्याणियां और भक्त अपनी आराध्य नंदादेवी को कैलाश भेजने की तैयारियों में लगे हुए हैं। रात में भजन कीर्तन के साथ मां नंदा के जागरों की संध्या होगी। 14 सितंबर को नंदाअष्टमी पर मां नंदादेवी की कैलाश विदाई होगी और 15 सितंबर नवमी तिथि को नंदा महोत्सव का समापन
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गौणा गांव पहुंचने पर सैकड़ों भक्तों ने मां नंदा की छंतोलियां का फूल-मालाओं से स्वागत किया। छंतोलियाें को समौण के रूप में भक्तों ने खाजा, चूड़ा, बिंदी, चूड़ी सहित ककड़ी, मुंगरी (मक्का) भेंट किया गया। वहीं नंदा के सिद्धपीठ कुरूड़ से राजराजेश्वरी देवी की छंतोली भी बंड क्षेत्र पहुंची थीं। जहां अन्य छंतोलियों के साथ मां राजराजेश्वरी भी कैलाश के लिए रवाना हुईं। वहीं जोशीमठ के पैनखंडा क्षेत्र में नंदा देवी व स्वनुल देवी जात कार्यक्रम शुक्रवार से शुरू हो गया है। रविवार को उर्गम घाटी के विभिन्न गांवों से मां नंदा की छंतोलियां कैलाश के लिए रवाना होंगी। पैनखंड क्षेत्र में 17 सितंबर तक नंदा लोकजात यात्रा कार्यक्रम होगा। वहीं, 14 सितंबर को बदरीनाथ के बामणी गांव में नंदा अष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इधर, निजमुला घाटी के गाड़ी गांव से शनिवार को मां नंदा की छंतोली सैंजी, मोली, मानुरा होते हुए रात्रि विश्राम को हडुंग पहुंची। 12 सितंबर को छंतोली हडुंग से रामणी पहुंचेगी।
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वाण गांव पहुंची मां नंदा की डोली
देवाल। नंदा की डोली व लोकजात यात्रा के लोहाजंग पहुंचने पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डोली के दर्शन किए। लोहाजंग में पूजा-अर्चना के बाद डोली आबादी क्षेत्र के अंतिम गांव वाण पहुंची। रविवार को मां नंदा की डोली व लोकजात यात्रा लाटू देवता की अगुवाई में वाण से निर्जन पड़ाव गैरोली पातल में प्रवास करेगी।
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शनिवार की सुबह पूूजा-अर्चना के बाद मुंदोली के ग्रामीणों ने डोली को दोपहर एक बजे लोहाजंग के चबूतरे पर पहुंचाया। यहां श्रद्धालुओं ने डोली के दूर से ही दर्शन किए। इसके बाद हंस फाउंडेशन और यूथ कांग्रेस की ओर से भंडारे का आयोजन भी किया गया। अपराह्न तीन बजे डोली ने वाण गांव के लिए प्रस्थान किया। वाण पहुंचने पर मां नंदा का श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। रविवार की सुबह नंदा की डोली लाटू देवता की अगुवाई में गैरोली पातल के लिए प्रस्थान करेगी। इस मौके पर हंस फाउंडेशन के बीरू जोशी, ब्लॉक प्रमुख दर्शन दानू, पूर्व विधायक डा. जीतराम, महाबीर बिष्ट, इंद्र राणा, देवी जोशी, गोविंद पांगती, बलबीर घुनियाल आदि शामिल रहे। संवाद
जागरों के बीच नंदा महोत्सव का आगाज
नारायणबगड़ के गांवों में सेवापाती उत्सव का आयोजन शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणबगड़। नंदा देवी लोकजात यात्रा के कैलाश की ओर बढ़ने के साथ ही क्षेत्र के गांवों में नंदा देवी सेवापाती उत्सवों का आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को लोदला, सिलोडी, झिंझोंणी, बूंगा, किमोली तथा नंदा देवी अन्नपूर्णा मठ पैतोली में नंदा जागरों के बीच नंदा महोत्सव का आगाज हुआ। पांच दिनों तक चलने वाले नंदा महोत्सव का समापन मां नंदा की कैलाश विदाई के साथ होगा।
शनिवार को बाजे-गाजों के साथ डुंगरी गांव से भूमियाल देवता के निशाण नंदा धाम अन्नपूर्णा मठ पैतोली पहुंचे। महिलाओं ने अक्षत व पुष्प वर्षा कर भूमियाल देवता की अगवानी की और मांगल गीतों से देवता की स्तुति की। इसी तरह अंय गांवों में भी पूजा अर्चना के साथ मां नंदादेवी सेवापाती उत्सव शुरू हुआ। गांव की ध्याणियां और भक्त अपनी आराध्य नंदादेवी को कैलाश भेजने की तैयारियों में लगे हुए हैं। रात में भजन कीर्तन के साथ मां नंदा के जागरों की संध्या होगी। 14 सितंबर को नंदाअष्टमी पर मां नंदादेवी की कैलाश विदाई होगी और 15 सितंबर नवमी तिथि को नंदा महोत्सव का समापन