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जोशीमठ की कल्पना की कहानी को मोदी ने बताया प्रेरणादायक
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में किया उर्गम की कल्पना की कहानी का जिक्र।
- फोटो : GOPESHWAR
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उर्गम घाटी के देवग्राम की कल्पना की कहानी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में जिक्र किया। उन्होंने कल्पना को सभी के लिए प्रेरणा बताया। कहा कि कल्पना का प्रयास एक भारत श्रेष्ठ भारत की सच्ची भावना से भरा हुआ है।
दरअसल, कल्पना जब तीसरी कक्षा में थी तब बीमारी के कारण उसकी आंखों की रोशनी चली गई। कल्पना के पिता रविंद्र नेगी सेलंग गांव में वेल्डिंग का काम करते हैं। आंख की रोशनी जाने के बाद कल्पना की पढ़ाई भी बंद हो गई थी। कुछ साल बाद मैसूर की रहने वाली प्रो. तारामूर्ति क्षेत्र में घूमने आई थीं तो उन्हें कल्पना के बारे में पता चला। इस पर वह कल्पना परिजनों से मिलीं और उनकी सहमति पर उसे अपने साथ ले गईं। कल्पना ने वहां कन्नड़ भाषा सीख ली और वहीं पढ़ाई करने लगी। इसी साल कर्नाटक बोर्ड की 10वीं की परीक्षा उसने 92 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा देश कई भाषाओं, बोलियों का खजाना है। देश की यह विविधता हमारी पहचान है, जो हमें एक सशक्त राष्ट्र बनाती है। इसी से जुड़ा एक बहुत ही प्रेरक उदाहरण एक बेटी कल्पना का है। कल्पना ने कर्नाटक में 10वीं की परीक्षा पास की है, लेकिन उसकी सफलता की खास बात यह है कि कुछ साल पहले तक कल्पना कन्नड़ भाषा नहीं जानती थी। तीन महीने में उसने कन्नड़ सीखी और इस साल दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास कर ली। वहीं देवग्राम के प्रधान देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि ग्रामीणों को कल्पना की मेहनत और सफलता पर गर्व है।
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दरअसल, कल्पना जब तीसरी कक्षा में थी तब बीमारी के कारण उसकी आंखों की रोशनी चली गई। कल्पना के पिता रविंद्र नेगी सेलंग गांव में वेल्डिंग का काम करते हैं। आंख की रोशनी जाने के बाद कल्पना की पढ़ाई भी बंद हो गई थी। कुछ साल बाद मैसूर की रहने वाली प्रो. तारामूर्ति क्षेत्र में घूमने आई थीं तो उन्हें कल्पना के बारे में पता चला। इस पर वह कल्पना परिजनों से मिलीं और उनकी सहमति पर उसे अपने साथ ले गईं। कल्पना ने वहां कन्नड़ भाषा सीख ली और वहीं पढ़ाई करने लगी। इसी साल कर्नाटक बोर्ड की 10वीं की परीक्षा उसने 92 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
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रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा देश कई भाषाओं, बोलियों का खजाना है। देश की यह विविधता हमारी पहचान है, जो हमें एक सशक्त राष्ट्र बनाती है। इसी से जुड़ा एक बहुत ही प्रेरक उदाहरण एक बेटी कल्पना का है। कल्पना ने कर्नाटक में 10वीं की परीक्षा पास की है, लेकिन उसकी सफलता की खास बात यह है कि कुछ साल पहले तक कल्पना कन्नड़ भाषा नहीं जानती थी। तीन महीने में उसने कन्नड़ सीखी और इस साल दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास कर ली। वहीं देवग्राम के प्रधान देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि ग्रामीणों को कल्पना की मेहनत और सफलता पर गर्व है।
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