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स्थापत्य और मूर्ति कला का अदभुत नमूना है आदिबदरी मंदिर समूह

Fri, 04 Oct 2019 09:36 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 09:36 PM IST
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Landslide threatens Adibadri temple group
आदिबदरी नाथ मंदिर
आदिबदरी। भारी-भरकम वाहनों की आवाजाही एवं बार-बार मंदिर परिसर की बुनियाद पर नालियों की खुदाई से आदिबदरी के 14 मंदिर समूह को खतरा पैदा हो गया है। पिछले कुछ सालों से मंदिर का प्रांगण लगातार धंस रहा है। धंसाव से मंदिर का एक खंबा भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
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कर्णप्रयाग-रानीखेत हाईवे पर आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा बनाया गया आदिबदरी मंदिर समूह गढ़वाल मंडल का सबसे बड़ा मंदिर है। जो अपनी स्थापत्य और मूर्ति कला का अद्भुत नमूना है। लेकिन, वर्तमान में इस मंदिर पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। मंदिर समूह की बुनियाद पर कई बार नालियों के निर्माण व ओएफसी लाइन बिछाने के लिए जेसीबी से नालियों की खुदाई की गई। इससे मंदिर के प्रांगण का आगे का हिस्सा धीरे-धीरे धंस रहा है और मुख्य मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को खतरा पैदा हो गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी, पुजारी चक्रधर थपलियाल, गैणा सिंह, बलवंत सिंह, धन्वंत्री प्रसाद, नवीन खंडूड़ी का कहना है कि हाईवे पर चलने वाले भारी भरकम वाहनों से भी मन्दिरों में कंपन पैदा हो रहा है। पूर्व में तीन बार बड़े वाहन मंदिर की रेलिंग तोड चुके हैं। वाहनों के दूषित धुएं और धूल से मंदिरों की चमक खत्म हो रही है। मुख्य मंदिर का एक पोल बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। भूकंप व भारी वाहनों के कंपन से क्षतिग्रस्त पोल कभी भी गिर कर जान माल को खतरा पैदा कर सकता है। नवानी ने कहा कि पुरातत्व विभाग मंदिर के संरक्षण में उदासी बरत रहा है। मंदिर समूह धीरे-धीरे झुक रहे हैं। मंदिर में बिजली की लाइन उखड़ गई है। पुरातत्व विभाग के कनिष्ठ संरक्षक सहायक अजय बागड़ी ने कहा कि क्षतिग्रस्त पोल व मंदिर की स्थिति के बारे में विभाग की टेक्निकल टीम जायजा लेगी। बड़े वाहनों की आवाजाही से मंदिर को खतरा बना है। मंदिर की सुरक्षा के लिए अगर हाईवे को वहां से हटाना पड़े तो इस पर भी विचार किया जायेगा।
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आठवीं शताब्दी में बना है मंदिर
कहा जाता है कि आदिबदरी मंदिर समूह को आदिगुरू शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में बनाया था। उसके बाद आठवीं से 11वीं सदी तक कत्यूरी राजाओं ने मंदिर की देखभाल की। पहले यहां पर 16 मंदिर समूह थे। लेकिन वर्तमान समय में दो मंदिर खंडित हो चुके हैं। मंदिर में प्रत्येक साल भगवान को नया अनाज चढ़ाने के लिए ग्रामीणों द्वारा नौठा कौथीग का आयोजन किया जाता है। आदिबदरी के दर्शनों के लिए साल भर यहां पर देश विदेश से आने वाले भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
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