फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   In the absence of play grounds are used sparkles talent

खेल मैदानों के अभाव में खेतों में निखर रही प्रतिभाएं

Sun, 24 Jan 2016 10:09 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला
ब्यूरो/ अमर उजाला Updated Sun, 24 Jan 2016 10:09 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
चमोली जनपद के  गांव-गांव में इन दिनों क्रिकेट टूर्नामेंट की धूम मची हुई है।

सीढ़ीनुमा  खेतों में चल रहे टूर्नामेंट में युवाओं का उत्साह भी देखते ही बन रहा है।

  कहीं चार खेतों के नीचे चौके की बाउंड्री बनाई गई है, तो कहीं चौके-छक्कों  पर ईनाम की बौछार लग रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान का अभाव है। 

सरकारें हर मंच से खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए कई घोषणाएं तो कर रही  है, लेकिन युवा ग्रामीण क्षेत्रों में एक अदद खेल मैदान के लिए तरसते रहते  हैं।
विज्ञापन


यहां क्रिकेट के साथ ही अधिकांश विद्यालयीय खेलकूद प्रतियोगिताएं भी  खेतों में ही संपन्न होती हैं।
प्रतिवर्ष दिसंबर माह के अंत से  गांव-गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू हो जाते हैं,

 जो फरवरी माह तक चलते  रहते हैं। टूर्नामेंट के विजेता और उपविजेता टीमों को नगद पुरस्कार और  ट्रॉफी दी जाती है।

टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए क्रिकेट टीमें भी  जनपद के सुदूर गांव-गांव से पहुंचती हैं। क्रिकेट की बारीकियों के जानकार  युवा को अपनी टीमों की ओर से खिलाने के लिए किराए पर बुलाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 ईराणी  गांव के मोहन सिंह का कहना है कि क्रिकेट टूर्नामेंट को लेकर ग्रामीण  युवाओं में दिनभर उत्साह जैसा माहौल रहता है।

 युवा टूर्नामेंट शुरू कराने  के लिए खेतों में धान काटने का इंतजार करते रहते हैं। जैसे ही धान की कटाई  होती है तो युवा क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन की तैयारियां शुरू कर देते  हैं।

यदि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान बनाए जाएं तो गांवों में छिपी  प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिल जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहचान बना चुका मनीष


 जनपद के सगर गांव का मनीष रावत भी इन्हीं खेतों में खेलकर आज  राष्ट्रीय  और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉक रेस में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है।


 मनीष वॉक रेस में चाईना में भी प्रतिभाग कर चुका है।

मनीष का चयन रियो  ओलंपिक के लिए भी हुआ है। सगर गांव निवासी सतेंद्र सिंह का कहना है कि मनीष  गांव के खेतों में खेलकर ही आगे गया है।

वह इंटर स्तर तक की पढ़ाई के लिए  प्रत्येक दिन छह किमी की पैदल दूरी तय कर जीआईसी गोपेश्वर पहुंचता था।
वर्ष  2008 से गांवों में खेल मैदान बनाने की योजना बनी थी।

मैदान बनाने के लिए  90 फीसदी अनुदान केंद्र और दस फीसदी राज्य सरकार की ओर से दिया जाना था।  चमोली जनपद में करीब दो सौ 30 गांवों में खेल मैदान बने भी हैं।

 लेकिन वर्ष  2013 से केंद्र सरकार से इस योजना में धनराशि नहीं मिल रही है, जिससे  मैदान निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
विनोद पंत, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी, चमोली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed