{"_id":"2332430760683b7676fdcb8542e0a76b","slug":"handmade-exibition-in-gauchar-mela-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ का हस्तशिल्प सीख रहे निशक्त बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ का हस्तशिल्प सीख रहे निशक्त बच्चे
कर्णप्रयाग
Updated Tue, 17 Nov 2015 05:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाट में संचालित निशक्त जनों का आश्रम शरीर से अकुशल लोगों को व्यवसायिक रूप से कुशल बना रहा है। आश्रम विकलांग बच्चों को टेडीबियर सहित पहाड़ के हस्तशिल्प में प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बना रहा है। बच्चों द्वारा तैयार किए गए पहाड़ी शिल्प के औजार इन दिनों गौचर मेले की प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। कुछ जरूरत मंद लोग इन औजारों को खरीद रहे हैं तो कुछ औजारों के साथ सेेल्फी लेते भी दिख रहे हैं।
जन कल्याण समाजोत्थान संस्था के अध्यक्ष शिवलाल स्नेही बताते हैं कि वर्ष 2009 से घाट ब्लाक की भेंटी रोड पर उनका आश्रम संचालित हो रहा है। जो अब साधना शारीरिक निशक्त जन आश्रम के नाम से मैठाणा में शुरू होने वाला है। बताया कि आश्रम में 15 से अधिक विकलांग बच्चे हैं। जो आश्रम में टेडीबियर के साथ-साथ हस्तशिल्प का काम करते हैं। इसमें पहाड़ के देवी देवताओं के निशानों के रूप में प्रयुक्त होने वाले त्रिशूल, चिमटे, दिए के अलावा दैनिक प्रयोग में आने वाले औजारों का निर्माण भी किया जाता है। इससे होने वाली आय से आश्रम को संचालित करने के साथ साथ विकलांग बच्चों की देखभाल और अन्य सुविधाओं के लिए किया जाता है। स्नेही ने बताया कि हस्तशिल्प के उत्पादों से आश्रम को करीब एक लाख सालाना की आय होती है। साथ ही आश्रम संचालन के लिए देहरादून की संस्था भी सहयोग करती है। कहा कि पहाड़ में नित्य प्रयोग होने वाला शिल्प अब लुप्त होने लगा है। इसके पुर्नजीवन और विकलांग बच्चों के हुनर के प्रदर्शन के लिए राज्यस्तरीय मेले में यह प्रदर्शनी लगाई गई है।
विज्ञापन
जन कल्याण समाजोत्थान संस्था के अध्यक्ष शिवलाल स्नेही बताते हैं कि वर्ष 2009 से घाट ब्लाक की भेंटी रोड पर उनका आश्रम संचालित हो रहा है। जो अब साधना शारीरिक निशक्त जन आश्रम के नाम से मैठाणा में शुरू होने वाला है। बताया कि आश्रम में 15 से अधिक विकलांग बच्चे हैं। जो आश्रम में टेडीबियर के साथ-साथ हस्तशिल्प का काम करते हैं। इसमें पहाड़ के देवी देवताओं के निशानों के रूप में प्रयुक्त होने वाले त्रिशूल, चिमटे, दिए के अलावा दैनिक प्रयोग में आने वाले औजारों का निर्माण भी किया जाता है। इससे होने वाली आय से आश्रम को संचालित करने के साथ साथ विकलांग बच्चों की देखभाल और अन्य सुविधाओं के लिए किया जाता है। स्नेही ने बताया कि हस्तशिल्प के उत्पादों से आश्रम को करीब एक लाख सालाना की आय होती है। साथ ही आश्रम संचालन के लिए देहरादून की संस्था भी सहयोग करती है। कहा कि पहाड़ में नित्य प्रयोग होने वाला शिल्प अब लुप्त होने लगा है। इसके पुर्नजीवन और विकलांग बच्चों के हुनर के प्रदर्शन के लिए राज्यस्तरीय मेले में यह प्रदर्शनी लगाई गई है।
विज्ञापन