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सिंगापुर से उड़कर आया दूल्हा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 21 Jan 2016 09:11 PM IST
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सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में कार्यरत चमोली के मैठाणा गांव का एक दूल्हा हेलीकाप्टर से गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
हेलीकाप्टर से उतरते ही दूल्हा नरेंद्र को उसकी बहन और मां ने गले लगा लिया।
दरअसल नरेंद्र की लग्नानुसार 20 जनवरी को शादी होनी तय थी, लेकिन चेन्नई बंदरगाह पर उसके पानी के जहाज को उतरने की अनुमति नहीं मिल पाई।
20 जनवरी की रात को अनुमति मिलने पर वह बिना समय गंवाएं एक दिन बाद यानी 21 जनवरी को दोपहर बारह बजे अपने घर पहुंचा। तब जाकर शादी समारोह की प्रक्रियाएं शुरू हुई।
मैठाणा गांव निवासी जगत सिंह का बड़ा बेटा नरेंद्र सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में सी मैन के पद पर कार्यरत है।
छह माह पूर्व शादी के लिए 20 जनवरी की तारीख पक्की होने के बाद वह सिंगापुर चला गया था।
उसने नवंबर माह में ही अधिकारियों से शादी के लिए अवकाश दिए जाने की बात कही थी, लेकिन चेन्नई बंदरगाह पर उसके पानी के जहाज को समय से उतरने की अनुमति नहीं मिल पाई।
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20 जनवरी की रात चेन्नई बंदरगाह पर जैसे ही उसके जहाज को उतरने की अनुमति मिली, तो नरेंद्र बिना समय गंवाए चेन्नई एयर पोर्ट पहुंचा। 21 जनवरी को सुबह नौ बजे जहाज से दिल्ली पहुंचने के बाद वहां से भी हेलीकाप्टर से उसने देहरादून के सहस्रधारा एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी।
देहरादून से मैठाणा की दूरी करीब 245 किमी है, लिहाजा उसने यहां से भी प्राइवेट हेलीकाप्टर का इंतजाम किया और दोपहर 12 बजे वह अपने गांव मैठाणा पहुंच गया। नरेंद्र के पहुंचते ही विवाह समारोह की प्रक्रियाएं शुरू हो गई।
परिजनों को सुनाई नरेंद्र ने आपबीती
नरेंद्र ने अपनी माता भागीरथी देवी और पिता जगत सिंह को बताया कि उसका पानी का जहाज चेन्नई बंदरगाह पर विगत 11 जनवरी को पहुंच चुका था।
पठानकोट में आतंकी हमले के चलते वहा प्रत्येक जहाज की गहनता से जांच हो रही थी। इस वजह से उनके जहाज को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल पाई।
वह जहाज के कैप्टन से शादी का हवाला देते हुए हर दिन जहाज लैंडिंग की जल्द अनुमति लेने की गुहार लगा रहा था, लेकिन अनुमति नहीं मिल पाई। वह बहुत बैचेन हो गया था।
शादी के दिन नजदीक आते ही उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। 20 जनवरी को जहाज के लैंडिंग की अनुमति मिलने पर जान में जान आई।
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हेलीकाप्टर से उतरते ही दूल्हा नरेंद्र को उसकी बहन और मां ने गले लगा लिया।
दरअसल नरेंद्र की लग्नानुसार 20 जनवरी को शादी होनी तय थी, लेकिन चेन्नई बंदरगाह पर उसके पानी के जहाज को उतरने की अनुमति नहीं मिल पाई।
20 जनवरी की रात को अनुमति मिलने पर वह बिना समय गंवाएं एक दिन बाद यानी 21 जनवरी को दोपहर बारह बजे अपने घर पहुंचा। तब जाकर शादी समारोह की प्रक्रियाएं शुरू हुई।
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मैठाणा गांव निवासी जगत सिंह का बड़ा बेटा नरेंद्र सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में सी मैन के पद पर कार्यरत है।
छह माह पूर्व शादी के लिए 20 जनवरी की तारीख पक्की होने के बाद वह सिंगापुर चला गया था।
उसने नवंबर माह में ही अधिकारियों से शादी के लिए अवकाश दिए जाने की बात कही थी, लेकिन चेन्नई बंदरगाह पर उसके पानी के जहाज को समय से उतरने की अनुमति नहीं मिल पाई।
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20 जनवरी की रात चेन्नई बंदरगाह पर जैसे ही उसके जहाज को उतरने की अनुमति मिली, तो नरेंद्र बिना समय गंवाए चेन्नई एयर पोर्ट पहुंचा। 21 जनवरी को सुबह नौ बजे जहाज से दिल्ली पहुंचने के बाद वहां से भी हेलीकाप्टर से उसने देहरादून के सहस्रधारा एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी।
देहरादून से मैठाणा की दूरी करीब 245 किमी है, लिहाजा उसने यहां से भी प्राइवेट हेलीकाप्टर का इंतजाम किया और दोपहर 12 बजे वह अपने गांव मैठाणा पहुंच गया। नरेंद्र के पहुंचते ही विवाह समारोह की प्रक्रियाएं शुरू हो गई।
परिजनों को सुनाई नरेंद्र ने आपबीती
नरेंद्र ने अपनी माता भागीरथी देवी और पिता जगत सिंह को बताया कि उसका पानी का जहाज चेन्नई बंदरगाह पर विगत 11 जनवरी को पहुंच चुका था।
पठानकोट में आतंकी हमले के चलते वहा प्रत्येक जहाज की गहनता से जांच हो रही थी। इस वजह से उनके जहाज को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल पाई।
वह जहाज के कैप्टन से शादी का हवाला देते हुए हर दिन जहाज लैंडिंग की जल्द अनुमति लेने की गुहार लगा रहा था, लेकिन अनुमति नहीं मिल पाई। वह बहुत बैचेन हो गया था।
शादी के दिन नजदीक आते ही उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। 20 जनवरी को जहाज के लैंडिंग की अनुमति मिलने पर जान में जान आई।