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अब गैरसैंण कनेक्टिविटी पर होगी नजर!

Fri, 18 Nov 2016 09:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली।
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली। Updated Fri, 18 Nov 2016 09:39 PM IST
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गैरसैंण में आवागमन सुविधाजनक बनाने के लिए सड़क और वायु मार्ग बनाया जाएगा सुविधाजनक
हैडिंग- अब गैरसैंण कनेक्टिविटी पर होगी नजर!

भराड़ीसैंण में आयोजित दो दिवसीय विधानसभा सत्र में हालांकि सरकार गैरसैंण के लिए विशेष कुछ नहीं कर सकी, लेकिन सवालों से बचती सरकार ने जताया कि ढांचागत सुविधाओं के विकास के साथ अब गैरसैंण पर सरकार का अगला कदम सड़क और एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।

इससे प्रदेश के किसी भी हिस्से से गैरसैंण आवागमन आसान हो सकेगा। इसके लिए गढ़वाल और कुमाऊं को गैरसैंण से जोड़ने के लिए सात सड़कों और दो बड़ी हवाई पट्टियों को बनाने की बात सामने आ रही हैं।
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भराड़ीसैंण में संपन्न हुए सरकार के अंतिम विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सीएम हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण में ढांचागत सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। विधानसभा भवन, विधायक और अफसर आवास के बाद अब जल्द सचिवालय का शिलान्यास किया जाएगा। इसके बाद अगला कदम गैरसैंण में सुविधाजनक आवागमन बनाना है।
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इसके लिए कई सड़कें पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं, जबकि सात सड़कों को जल्द मंजूरी दी जाएगी। इसमें कोड़ियाला-व्यासघाट-सतपुली-थलीसैंण, क्वींठी-ग्वालदम-भराड़ीसैंण, धरांसू-लंबगांव, चंबा-मलेथा, पीठसैंण-उफराईखाल-पांडुवाखाल, जौनाई-बछुवाबाण, मरचूला-बछुवाबाण का निर्माण जरूरी है। यही नहीं गौचर हवाई पट्टी को बड़े विमानों के लिए अनुपयोगी बताते हुए गौचर के पास सारी की पहाड़ी और एक कुमाऊं में हवाई पट्टी बनानी आवश्यक है।

यूकेडी ने रखा उपवास
स्थायी राजधानी की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को भी उपवास रखा। रामलीला मैदान में उपवास पर बैठे कार्यकर्ताओं ने कहा कि कांग्रेस गैरसैंण में ढांचागत सुविधाओं को विकसित करने का सिर्फ ढोल बजा रही है।

वहीं भाजपा का भी गैरसैंण को लेकर रुख स्पष्ट नहीं है। दल के प्रचार मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा यदि सरकार जल्द गैरसैंण को राजधानी घोषित नहीं करती तो उक्रांद सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा। इस अवसर पर केंद्रीय उपाध्यक्ष असन लाल शाह, केंद्रीय संगठन मंत्री बच्चीराम उनियाल, केंद्रीय प्रवक्ता सत्यप्रकाश सती और केएल शाह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।


नहीं दिखी भीड़
दिवालीखाल से बिना पास के लोगों को भराड़ीसैंण नहीं जाने दिया गया, जबकि पास बनाने का काम भराड़ीसैंण में था। इस कारण भराड़ीसैंण में भीड़ कम दिखी। भराड़ीसैंण से दिवालीखाल चार किमी दूर है। राज्य आंदोलनकारी महेशानंद जुयाल का कहना है कि पास की समस्या के साथ-साथ तीन सत्र में गैरसैंण जिला न बनाए जाने से भी लोगों में उत्साह कम दिखा।

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