{"_id":"9e2e1ec725dedc34542d2173beff2b61","slug":"fragrence-of-champa-flowers-in-gopeshwar-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंपा की खुशबू से महकने लगा गोपेश्वर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंपा की खुशबू से महकने लगा गोपेश्वर
गोपेश्वर
Updated Thu, 14 Jan 2016 06:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धार्मिक और औषधीय गुणों से भरपूर चंपा के फूल गोपेश्वर नगर में चारों ओर अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं। वर्ष 2003 में पर्यावरणविद् चक्रधर तिवारी ने अलकनंदा वन प्रभाग के सहयोग से नगर में चंपा के पौधों को रोपने की मुहिम शुरू की थी।
यहां कलेक्ट्रेट, वन विभाग, लोनिवि, पूल्ड हाउस, पुलिस लाइन और पुलिस मैदान की सड़कों पर चंपा के पौधे लगे हुए हैं। जो इन दिनों पुष्पित होकर शहर में खुशबू फैला रहे हैं। 29 अगस्त 2013 को चक्रधर तिवारी के निधन के बाद उनके शिक्षक पुत्र मनोज तिवारी ने चंपा के पौधों का संरक्षण किया। उनका कहना है कि चंपा के फूलों की यह इंडोनेशियन प्रजाति है। पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए चंपा का पौधा उपयोगी होता है। चंपा का पौधा दो से तीन वर्ष के भीतर फूल देने लगता है। यह सदाबहार पौधा बीस से तीस फुट ऊंचा होता है।
ये है मान्यता
चंपा का पुष्प भगवान शिव का प्रिय पुष्प है। मान्यता है कि यह पुष्प समुद्र मंथन के दौरान रत्न के रूप में प्रकट हुआ था। चंपा का पौधा पारिजात के नाम से जाना गया है। इस फूल की खुशबू संसार के सभी फूलों की खुशबू से बेहतर मानी जाती है। घर के आंगन में लगाए जाने वाला यह पौधा सुख समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
विज्ञापन
औषधीय गुणों से भरपूर है चंपा का पौधा
चंपा के फूल, पत्ते और छाल में औषधीय गुण छिपे हुए हैं। इसके पत्तों का रस पीने से पेट की बीमारी दूर होती है। चंपा के सूखे पत्तों को पीसकर कुष्ट रोग के घाव में लगाने से ठीक हो जाता है। दाद, खाज, खुजली को मिटाने के लिए भी चंपा का पुष्प फायदेमंद साबित होता है। चंपा के पेड़ की छाल से भी दवाई बनाई जाती है।
विज्ञापन
यहां कलेक्ट्रेट, वन विभाग, लोनिवि, पूल्ड हाउस, पुलिस लाइन और पुलिस मैदान की सड़कों पर चंपा के पौधे लगे हुए हैं। जो इन दिनों पुष्पित होकर शहर में खुशबू फैला रहे हैं। 29 अगस्त 2013 को चक्रधर तिवारी के निधन के बाद उनके शिक्षक पुत्र मनोज तिवारी ने चंपा के पौधों का संरक्षण किया। उनका कहना है कि चंपा के फूलों की यह इंडोनेशियन प्रजाति है। पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए चंपा का पौधा उपयोगी होता है। चंपा का पौधा दो से तीन वर्ष के भीतर फूल देने लगता है। यह सदाबहार पौधा बीस से तीस फुट ऊंचा होता है।
विज्ञापन
ये है मान्यता
चंपा का पुष्प भगवान शिव का प्रिय पुष्प है। मान्यता है कि यह पुष्प समुद्र मंथन के दौरान रत्न के रूप में प्रकट हुआ था। चंपा का पौधा पारिजात के नाम से जाना गया है। इस फूल की खुशबू संसार के सभी फूलों की खुशबू से बेहतर मानी जाती है। घर के आंगन में लगाए जाने वाला यह पौधा सुख समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
विज्ञापन
औषधीय गुणों से भरपूर है चंपा का पौधा
चंपा के फूल, पत्ते और छाल में औषधीय गुण छिपे हुए हैं। इसके पत्तों का रस पीने से पेट की बीमारी दूर होती है। चंपा के सूखे पत्तों को पीसकर कुष्ट रोग के घाव में लगाने से ठीक हो जाता है। दाद, खाज, खुजली को मिटाने के लिए भी चंपा का पुष्प फायदेमंद साबित होता है। चंपा के पेड़ की छाल से भी दवाई बनाई जाती है।