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Chamoli News: प्राणमति नदी में आई बाढ़ से पांच मकान और पांच पुल बहे
Mon, 14 Aug 2023 05:51 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 14 Aug 2023 05:51 PM IST
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अतिवृष्टि से थराली गांव में हुआ भारी नुकसान, गोशाला मलबे में दबी, कृषि भूमि और कार बही
गनीमत रही बाढ़ आने से पहले ही लोगों ने छोड़ दिए थे घर
15 से अधिक गांवों का आपस में कटा संपर्क
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। रविवार रात को थराली ब्लॉक के साेल घाटी के ऊपरी ब्रह्मताल बुग्याल में हुई अतिवृष्टि से प्राणमति नदी में बाढ़ आ गई। इस बाढ़ से थराली के रतगांव में बैली ब्रिज, डुंगरी में एक झूला पुल, थराली गांव में एक बैली ब्रिज, एक मोटर पुल और प्राणमति झूला पुल बह गए। थराली गांव में दो और ढाढरबगड़ में तीन मकान बह गए। थराली गांव में दो गोशाला मलबे में दब गईं और चार पशु बह गए। साथ ही 10 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि और दो कार भी बह गईं। एक युवक डूबने से बच गया। गनीमत रही कि बाढ़ आते ही लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर भागे और जान बचाई। रात में ही पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को अलर्ट किया। अतिवृष्टि से 15 से अधिक गांवों का आपस में संपर्क कट गया है।
थराली के साेल घाटी के ऊपरी ब्रह्मताल बुग्याल में अतिवृष्टि से भारी मात्रा में मलबा और पेड़ प्राणमति नदी में बाढ़ आ गई। नदी के सैलाब से थराली गांव में थराली-पैनगढ़ गांव को जोड़ने वाले मोटर पुल के पीछे झील बन गई और पुल टूट गया। इसके बाद सैलाब का रुख कोटडीप के नीचे बसे थराली गांव की तरफ हो गया। मलबा आने की आवाज सुनते ही लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे और दो मिनट बाद ही दो मकान और गोशालाएं बह गईं। एक दौरान एक युवक धीरेंद्र सिंह बह गया लेकिन कुछ दूरी पर जाकर उसने एक पेड़ की टहनी पकड़ ली और बच गया। वहीं सोल घाटी के ढाढरबगड़ में भी तीन मकान बहे हैं। बुरसोल के मदन सिंह और रणजीत सिंह ने बताया कि प्राणमति में आई बाढ़ से चार किमी दूर बसे घर खतरे में आ गए हैं। थानाध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि बारिश में कभी भी नदी किनारे रहने वाले लोगों को खतरा हो सकता है। भारी बारिश होने की स्थिति में वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
तीन हजार की आबादी प्रभावित
थराली। अतिवृष्टि से प्राणमति नदी में आई बाढ़ से मोटर पुल और बैली ब्रिज बहने से थराली और सूना गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। इन गांवों को जोड़ने वाला यही एकमात्र पुल था। पुल बहने से इन गांवों की तीन हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो गई है। सूना और थराली गांव का बाजार, अस्पताल और स्कूल थराली में है लेकिन बीचों बीच पुल बहने से अब इन दोनों क्षेत्रों का संपर्क कट गया है। जहां पुल बहा वहां नदी की चौड़ाई दो सौ मीटर से अधिक हो गई है और फिलहाल यहां पर आवाजाही की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। वहीं रतगांव का बैली ब्रिज बहने से गांव की पांच हजार से अधिक आबादी गांवों में कैद होकर रह गई है। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह,सुबेदार हरी राम, सुजान सिंह, बलवंत सिंह आदि का कहना है कि सड़क यहां पर दो माह से ही बंद थी। एकमात्र सहारा बैली ब्रिज का था वो भी बह गया है। आवाजाही का कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने गांवों में राशन और दवाइयां उपलब्ध कराने और नदी से आर-पार जाने के लिए एक ट्रॉली लगाने की मांग की। संवाद
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रानों गांव स्थित थानेश्वर शिवालय बहा
गौचर। रविवार रात को अलकनंदा नदी उफान पर आने से रानौ ग्राम पंचायत के अंतर्गत अलकनंदा नदी तट पर स्थित थानेश्वर शिवालय बह गया। यह मंदिर काफी पुराना था। सावन मास का आखिरी सोमवार होने पर श्रद्धालुओं ने यहां पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन रखा था। जब सुबह को श्रद्धालु पूजा के लिए मंदिर पहुंचे तो वहां मंदिर का नामो निशान तक नहीं मिला। रानौ गांव के ग्राम प्रधान चंद्रमोहन सिंह ने कहा कि रेलवे की कार्यदायी कंपनी की ओर से बनाए गए पुल के पिलर और डायवर्जन सिस्टम से अलकनंदा नदी का जलस्तर मंदिर की ओर मुड़ा और बाढ़ सुरक्षा के उपाय न करने से यह प्राचीन मंदिर नदी के तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। नदी के कटाव से रानौ सड़क मार्ग का एक बड़ा हिस्सा भी ध्वस्त हो गया जिससे रानौ, सूगी, बमोथ, करछुना, कुमेड़ा, छंदोली, गडूना, कांडा आदि पोखरी ब्लॉक के गांवों का सड़क संपर्क कट गया है। संवाद
छानियों में फंसे बुरसोल गांव के सौ परिवार
थराली। मूसलाधार बारिश से बुरसोल के प्रांत गदेरे पर बनी अस्थायी पुलिया बहने से सोल घाटी के बुरसोल गांव के सौ से अधिक परिवार प्रांत तोक में छानियों के फंस गए हैं। गर्मियों और बरसात में बूंगा, बुरसोल और गेरूड़ गांव के लोग पशुपालन और खेती के लिए छानियों में जाते हैं और इसी पुल से आवागमन करते हैं। बुरसोल के मदन सिंह ने कहा कि यहां बिजली नहीं होने से मोबाइल भी बंद हो गए हैं। पहले तो गदेरे का जलस्तर कम था तो ग्रामीणों ने चीड़ के पेड़ डालकर पुल बनाया था। अब गदेरा उफान पर है। फिलहाल यहां पर पुलिया भी नहीं बनाई जा सकती है। संवाद
नारायणबगड़ : घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर गए
नारायणबगड़। थराली ब्लॉक में अतिवृष्टि से पिंडर नदी का जलस्तर बढ़ने से नारायणबगड़ में रातभर अफरातफरी का माहौल बना रहा। रविवार रात को पुलिस ने 11 बजे नदी किनारे रह रहे लोगों को अलर्ट किया और लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इस दौरान नारायणबगड़ में नदी के दोनों छोरों पर अफरातफरी मची रही। लोगों ने सारी रात जागकर काटी। पिंडर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था। संवाद
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गनीमत रही बाढ़ आने से पहले ही लोगों ने छोड़ दिए थे घर
15 से अधिक गांवों का आपस में कटा संपर्क
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संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। रविवार रात को थराली ब्लॉक के साेल घाटी के ऊपरी ब्रह्मताल बुग्याल में हुई अतिवृष्टि से प्राणमति नदी में बाढ़ आ गई। इस बाढ़ से थराली के रतगांव में बैली ब्रिज, डुंगरी में एक झूला पुल, थराली गांव में एक बैली ब्रिज, एक मोटर पुल और प्राणमति झूला पुल बह गए। थराली गांव में दो और ढाढरबगड़ में तीन मकान बह गए। थराली गांव में दो गोशाला मलबे में दब गईं और चार पशु बह गए। साथ ही 10 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि और दो कार भी बह गईं। एक युवक डूबने से बच गया। गनीमत रही कि बाढ़ आते ही लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर भागे और जान बचाई। रात में ही पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को अलर्ट किया। अतिवृष्टि से 15 से अधिक गांवों का आपस में संपर्क कट गया है।
थराली के साेल घाटी के ऊपरी ब्रह्मताल बुग्याल में अतिवृष्टि से भारी मात्रा में मलबा और पेड़ प्राणमति नदी में बाढ़ आ गई। नदी के सैलाब से थराली गांव में थराली-पैनगढ़ गांव को जोड़ने वाले मोटर पुल के पीछे झील बन गई और पुल टूट गया। इसके बाद सैलाब का रुख कोटडीप के नीचे बसे थराली गांव की तरफ हो गया। मलबा आने की आवाज सुनते ही लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे और दो मिनट बाद ही दो मकान और गोशालाएं बह गईं। एक दौरान एक युवक धीरेंद्र सिंह बह गया लेकिन कुछ दूरी पर जाकर उसने एक पेड़ की टहनी पकड़ ली और बच गया। वहीं सोल घाटी के ढाढरबगड़ में भी तीन मकान बहे हैं। बुरसोल के मदन सिंह और रणजीत सिंह ने बताया कि प्राणमति में आई बाढ़ से चार किमी दूर बसे घर खतरे में आ गए हैं। थानाध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि बारिश में कभी भी नदी किनारे रहने वाले लोगों को खतरा हो सकता है। भारी बारिश होने की स्थिति में वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
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तीन हजार की आबादी प्रभावित
थराली। अतिवृष्टि से प्राणमति नदी में आई बाढ़ से मोटर पुल और बैली ब्रिज बहने से थराली और सूना गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। इन गांवों को जोड़ने वाला यही एकमात्र पुल था। पुल बहने से इन गांवों की तीन हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो गई है। सूना और थराली गांव का बाजार, अस्पताल और स्कूल थराली में है लेकिन बीचों बीच पुल बहने से अब इन दोनों क्षेत्रों का संपर्क कट गया है। जहां पुल बहा वहां नदी की चौड़ाई दो सौ मीटर से अधिक हो गई है और फिलहाल यहां पर आवाजाही की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। वहीं रतगांव का बैली ब्रिज बहने से गांव की पांच हजार से अधिक आबादी गांवों में कैद होकर रह गई है। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह,सुबेदार हरी राम, सुजान सिंह, बलवंत सिंह आदि का कहना है कि सड़क यहां पर दो माह से ही बंद थी। एकमात्र सहारा बैली ब्रिज का था वो भी बह गया है। आवाजाही का कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने गांवों में राशन और दवाइयां उपलब्ध कराने और नदी से आर-पार जाने के लिए एक ट्रॉली लगाने की मांग की। संवाद
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रानों गांव स्थित थानेश्वर शिवालय बहा
गौचर। रविवार रात को अलकनंदा नदी उफान पर आने से रानौ ग्राम पंचायत के अंतर्गत अलकनंदा नदी तट पर स्थित थानेश्वर शिवालय बह गया। यह मंदिर काफी पुराना था। सावन मास का आखिरी सोमवार होने पर श्रद्धालुओं ने यहां पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन रखा था। जब सुबह को श्रद्धालु पूजा के लिए मंदिर पहुंचे तो वहां मंदिर का नामो निशान तक नहीं मिला। रानौ गांव के ग्राम प्रधान चंद्रमोहन सिंह ने कहा कि रेलवे की कार्यदायी कंपनी की ओर से बनाए गए पुल के पिलर और डायवर्जन सिस्टम से अलकनंदा नदी का जलस्तर मंदिर की ओर मुड़ा और बाढ़ सुरक्षा के उपाय न करने से यह प्राचीन मंदिर नदी के तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। नदी के कटाव से रानौ सड़क मार्ग का एक बड़ा हिस्सा भी ध्वस्त हो गया जिससे रानौ, सूगी, बमोथ, करछुना, कुमेड़ा, छंदोली, गडूना, कांडा आदि पोखरी ब्लॉक के गांवों का सड़क संपर्क कट गया है। संवाद
छानियों में फंसे बुरसोल गांव के सौ परिवार
थराली। मूसलाधार बारिश से बुरसोल के प्रांत गदेरे पर बनी अस्थायी पुलिया बहने से सोल घाटी के बुरसोल गांव के सौ से अधिक परिवार प्रांत तोक में छानियों के फंस गए हैं। गर्मियों और बरसात में बूंगा, बुरसोल और गेरूड़ गांव के लोग पशुपालन और खेती के लिए छानियों में जाते हैं और इसी पुल से आवागमन करते हैं। बुरसोल के मदन सिंह ने कहा कि यहां बिजली नहीं होने से मोबाइल भी बंद हो गए हैं। पहले तो गदेरे का जलस्तर कम था तो ग्रामीणों ने चीड़ के पेड़ डालकर पुल बनाया था। अब गदेरा उफान पर है। फिलहाल यहां पर पुलिया भी नहीं बनाई जा सकती है। संवाद
नारायणबगड़ : घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर गए
नारायणबगड़। थराली ब्लॉक में अतिवृष्टि से पिंडर नदी का जलस्तर बढ़ने से नारायणबगड़ में रातभर अफरातफरी का माहौल बना रहा। रविवार रात को पुलिस ने 11 बजे नदी किनारे रह रहे लोगों को अलर्ट किया और लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इस दौरान नारायणबगड़ में नदी के दोनों छोरों पर अफरातफरी मची रही। लोगों ने सारी रात जागकर काटी। पिंडर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था। संवाद