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पुनर्वास तो कर दिया सुविधाएं नहीं दीं
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 16 Jan 2016 09:18 PM IST
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नारायणबगड़ ब्लाक के त्यूंला गांव के आपदा प्रभावितों का पुनर्वास तो सरकार ने कर दिया है, लेकिन इन प्रभावितों को बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देना भूल गई।
बिजली और पानी की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए लोग दफ्तरों और अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील भारद्वाज, ग्राम प्रधान सुनीता देवी, हरेंद्र सिंह, महावीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, त्रिलोक सिंह और बलवीर सिंह आदि ने कहा कि वर्ष 2013 में त्यूंला गांव भारी भूस्खलन की चपेट में आ गया था, जिसके चलते यहां के 40 से अधिक परिवारों को मजेठी और पोखड़ा तोकों में बसा दिया।
दोनों तोकों में ग्राम पंचायत के करीब 20-20 परिवार 2014 के अंत तक मकान बनाकर यहीं बस गए, लेकिन शासन-प्रशासन ने यहां न तो बिजली की लाइनें जोड़ी और न ही पानी की।
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ऐसे में प्रभावित 13 माह बाद भी बिना बिजली के इन गांवों में रह रहे हैं। पानी के लिए रबड़ के पाइपों को दूसरे गांवों की लाइन से जोड़कर जरूरत पूरी कर रहे हैं।
बीडीसी सदस्य सुनील भारद्वाज ने बताया कि ऊर्जा निगम, जलसंस्थान सहित मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी तक से समस्या हल करने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक न बिजली की सुविधा मिली न पानी की।
कोट
मजेठी और पोखड़ा तोकों में बहुल ग्राम पेयजल योजना से एक-एक कनेक्शन दिया गया है, लेकिन एक योजना पर कई गांवों के निर्भर होने से दिक्कतें हो रही हैं। योजना के पुनर्गठन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। - दिनेश पुरोहित अवर अभियंता जलसंस्थान।
मजेठी और पोखड़ा तोकों का विद्युतीकरण का प्रस्ताव दीन दयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत रखा गया है। निगम के पास प्रभावितों के लिए कोई अलग पैसा नहीं है। ऐसे में स्वीकृति मिलने पर ही तोकों का विद्युतीकरण हो पाएगा। - देवेंद्र सिंह पंवार, उपखंड अधिकारी ऊर्जा निगम थराली।
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बिजली और पानी की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए लोग दफ्तरों और अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील भारद्वाज, ग्राम प्रधान सुनीता देवी, हरेंद्र सिंह, महावीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, त्रिलोक सिंह और बलवीर सिंह आदि ने कहा कि वर्ष 2013 में त्यूंला गांव भारी भूस्खलन की चपेट में आ गया था, जिसके चलते यहां के 40 से अधिक परिवारों को मजेठी और पोखड़ा तोकों में बसा दिया।
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दोनों तोकों में ग्राम पंचायत के करीब 20-20 परिवार 2014 के अंत तक मकान बनाकर यहीं बस गए, लेकिन शासन-प्रशासन ने यहां न तो बिजली की लाइनें जोड़ी और न ही पानी की।
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ऐसे में प्रभावित 13 माह बाद भी बिना बिजली के इन गांवों में रह रहे हैं। पानी के लिए रबड़ के पाइपों को दूसरे गांवों की लाइन से जोड़कर जरूरत पूरी कर रहे हैं।
बीडीसी सदस्य सुनील भारद्वाज ने बताया कि ऊर्जा निगम, जलसंस्थान सहित मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी तक से समस्या हल करने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक न बिजली की सुविधा मिली न पानी की।
कोट
मजेठी और पोखड़ा तोकों में बहुल ग्राम पेयजल योजना से एक-एक कनेक्शन दिया गया है, लेकिन एक योजना पर कई गांवों के निर्भर होने से दिक्कतें हो रही हैं। योजना के पुनर्गठन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। - दिनेश पुरोहित अवर अभियंता जलसंस्थान।
मजेठी और पोखड़ा तोकों का विद्युतीकरण का प्रस्ताव दीन दयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत रखा गया है। निगम के पास प्रभावितों के लिए कोई अलग पैसा नहीं है। ऐसे में स्वीकृति मिलने पर ही तोकों का विद्युतीकरण हो पाएगा। - देवेंद्र सिंह पंवार, उपखंड अधिकारी ऊर्जा निगम थराली।