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26 साल पहले भी 68 फीसदी जनता थी गैरसैंण के पक्ष में

Thu, 05 Mar 2020 10:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2020 10:18 PM IST
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Even 26 years ago, 68 percent of the public was in favor of Garsain
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की लड़ाई लड़ रहे संगठनों और राज्य आंदोलनकारियों ने ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोेषणा को मानने से इनकार कर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि शहीदों ने पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ पर ही बनाए जाने के लिए कुर्बानी दी थी। जब तक उनका यह सपना साकार नहीं होगा, वे भी चुप बैठने वाले नहीं हैं। कहा, आज से 26 वर्ष पूर्व अविभाजित उत्तर प्रदेश में गठित कौशिक समिति ने भी गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाए जाने की सिफारिश की थी। तब भी 68 प्रतिशत जनता ने गैरसैंण के पक्ष में ही अपनी राय दी थी।
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भराड़ीसैंण सत्र में बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने से जहां आज सत्ता पक्ष प्रदेश भर में जश्न मना रहा है, वहीं राज्य आंदोलन में सक्रिय रहे संगठन और राज्य आंदोलनकारी सरकार के इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते। राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि अविभाजित उत्तरप्रदेश में वर्ष 1994 में गठित रमाशंकर कौशिक समिति ने भी उत्तराखंड राज्य गठन के साथ ही गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाए जाने की सिफारिश की थी। उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने के अंतरिम सरकार द्वारा राजधानी के चयन को गठित दीक्षित आयोग ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों के साथ ही राजधानी के लायक बुनियादी सुविधाओं का अभाव होने से गैरसैंण को उपयुक्त नहीं माना था लेकिन जनता की राय गैरसैंण के पक्ष में ही बताई थी। भाकपा माले के वरिष्ठ नेता इंद्रेश मैखुरी का कहना है कि गैरसैंण को जब तक स्थायी राजधानी नहीं बनाया जाता, उनका दल चुप नहीं बैठेगा। गैरसैंण राजधानी के लिए जनता लगातार आंदोलित रही है। बाबा मोहन उत्तराखंडी ने बेनीताल में भूख हड़ताल कर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। पिछले विधानसभा सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए आंदोलन करने पर 38 आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए गए। स्थायी राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने दोहराया कि जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी नहीं बनाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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