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जिला पंचायत की बैठक का बहिष्कार
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जिला पंचायत की त्रैमासिक बैठक में आला अधिकारियों के न पहुंचने पर सदस्यों ने सदन का बहिष्कार कर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी ने कहा कि अधिकारियों का यही रवैया रहा तो इस संबंध में शासन को लिखा जाएगा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने अधिकारियों के खिलाफ और जिला नियोजन समिति (डीपीसी) का गठन न होने पर निंदा प्रस्ताव पारित किया। सदस्यों ने निर्णय लिया है कि जब तक डीपीसी का गठन नहीं होगा, तब तक जिला पंचायत की बैठकों का बहिष्कार किया जाएगा।
मंगलवार सुबह 11 बजे जिला पंचायत सभागार में बैठक शुरू हुई, लेकिन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी में से एक भी अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सदस्यों ने आधा घंटे तक अधिकारियों का इंतजार भी किया, लेकिन बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ, जल निगम व जल संस्थान के अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम के प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी सहित कुछ ही अधिकारी बैठक में आए, जिस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और सदन से बाहर आ गए।
जिला पंचायत सदस्य पिलंग विक्रम बर्त्वाल का कहना है कि जिला पंचायत जिले का सर्वोच्च सदन है, लेकिन सदन में अधिकारियों की गैर मौजूदगी जिले के विकास को लेकर अधिकारियों की गंभीरता को दर्शा रही है। जिला पंचायत सदस्य थिरपाक लक्ष्मण सिंह और देवी जोशी ने कहा कि पिछले दो साल से डीपीसी का गठन नहीं हुआ है। इसका सदस्यों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य अवतार पुंडीर, अनिल अग्रवाल, आशा धपोला, भागीरथी रावत, लक्ष्मी कठैत, बबीता देवी, बबीता त्रिकोटी, मंजू कठैत, दीपा देवी, विनोद नेगी, कृष्णा सिंह, विक्रम बर्त्वाल और सूरज सैलानी मौजूद थे।
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कोट
जिला पंचायत की बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों का न पहुंचना बेहद खेदजनक है। बैठक में आवश्यक रूप से विभागाध्यक्षों को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम और सीडीओ में से किसी एक को मौजूद रहना चाहिए था, लेकिन वे भी नहीं पहुंचे। अधिकारियों का ऐसे ही रवैया रहा तो इस संबंध में शासन में बात की जाएगी। - रजनी भंडारी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, चमोली।
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मंगलवार सुबह 11 बजे जिला पंचायत सभागार में बैठक शुरू हुई, लेकिन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी में से एक भी अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सदस्यों ने आधा घंटे तक अधिकारियों का इंतजार भी किया, लेकिन बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ, जल निगम व जल संस्थान के अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम के प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी सहित कुछ ही अधिकारी बैठक में आए, जिस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और सदन से बाहर आ गए।
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जिला पंचायत सदस्य पिलंग विक्रम बर्त्वाल का कहना है कि जिला पंचायत जिले का सर्वोच्च सदन है, लेकिन सदन में अधिकारियों की गैर मौजूदगी जिले के विकास को लेकर अधिकारियों की गंभीरता को दर्शा रही है। जिला पंचायत सदस्य थिरपाक लक्ष्मण सिंह और देवी जोशी ने कहा कि पिछले दो साल से डीपीसी का गठन नहीं हुआ है। इसका सदस्यों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य अवतार पुंडीर, अनिल अग्रवाल, आशा धपोला, भागीरथी रावत, लक्ष्मी कठैत, बबीता देवी, बबीता त्रिकोटी, मंजू कठैत, दीपा देवी, विनोद नेगी, कृष्णा सिंह, विक्रम बर्त्वाल और सूरज सैलानी मौजूद थे।
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जिला पंचायत की बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों का न पहुंचना बेहद खेदजनक है। बैठक में आवश्यक रूप से विभागाध्यक्षों को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम और सीडीओ में से किसी एक को मौजूद रहना चाहिए था, लेकिन वे भी नहीं पहुंचे। अधिकारियों का ऐसे ही रवैया रहा तो इस संबंध में शासन में बात की जाएगी। - रजनी भंडारी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, चमोली।