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ढोल-दमाऊं की थाप र तिमुंड्या ने किया अद्भुत नृत्य
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जोशीमठ के नृसिंह मंदिर परिसर में आयोजित तिमुंड्या कौथिग में उमड़े श्रद्घालु।
- फोटो : GOPESHWAR
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नृसिंह मंदिर परिसर में तिमुंड्या कौथिग का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महिलाओं ने पीले वस्त्र धारण कर पारंपरिक झुमेलो नृत्य किया।
शनिवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे से मंदिर परिसर में तिमुंड्या कौथिग शुरू हुआ। सबसे पहले भगवान नृसिंह और मां दुर्गा की विशेष पूजा हुई। देवपाठी ब्राह्मणों ने मां दुर्गा के साथ ही तिमुंड्या का आह्वान किया। तिमुंड्या ने अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल दमाऊं की थाप पर तिमुंड्या ने अद्भुत नृत्य किया। इसके बाद श्रद्धालुओं की ओर से लगाए गए भोग को गृहण किया।
यह आयोजन प्रतिवर्ष बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने से पूर्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में तिमुंड्या नामक दानव के प्रकोप से मानव त्रस्त हो गए थे। तब मां दुर्गा ने इस दानव को पराजित कर उसे अपना सेवक बना लिया था। यह दानव मांसाहारी था। मांस न मिलने वह जब उत्पात मचाने लगा तो मां भगवती दुर्गा ने उसे वर्षभर में एक बार मांस का भोग लगवाने का वचन दिया। इसी के तहत प्रतिवर्ष नृसिंह मंदिर परिसर में तिमुंड्या कौथिग का भव्य रूप से आयोजन किया जाता है। माता के वचनों का देवी भक्त आज भी निर्वहन करते आ रहे हैं। कौथिग के दौरान तिमुंड्या को चावल, गुड़, मांस और जल का भोग लगाया जाता है। मंदिर परिसर में भारी संख्या में पहुंचे देवी भक्तों ने तिमुंड्या देवता से मनौतियां मांगी और आशीर्वाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर देव पुजाई समिति के अध्यक्ष भगवती प्रसाद नंबूरी, लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार, बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, अवतारी पुरुष भोला सिंह नामण, भरत सिंह बेजवाड़ी आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे से मंदिर परिसर में तिमुंड्या कौथिग शुरू हुआ। सबसे पहले भगवान नृसिंह और मां दुर्गा की विशेष पूजा हुई। देवपाठी ब्राह्मणों ने मां दुर्गा के साथ ही तिमुंड्या का आह्वान किया। तिमुंड्या ने अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल दमाऊं की थाप पर तिमुंड्या ने अद्भुत नृत्य किया। इसके बाद श्रद्धालुओं की ओर से लगाए गए भोग को गृहण किया।
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यह आयोजन प्रतिवर्ष बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने से पूर्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में तिमुंड्या नामक दानव के प्रकोप से मानव त्रस्त हो गए थे। तब मां दुर्गा ने इस दानव को पराजित कर उसे अपना सेवक बना लिया था। यह दानव मांसाहारी था। मांस न मिलने वह जब उत्पात मचाने लगा तो मां भगवती दुर्गा ने उसे वर्षभर में एक बार मांस का भोग लगवाने का वचन दिया। इसी के तहत प्रतिवर्ष नृसिंह मंदिर परिसर में तिमुंड्या कौथिग का भव्य रूप से आयोजन किया जाता है। माता के वचनों का देवी भक्त आज भी निर्वहन करते आ रहे हैं। कौथिग के दौरान तिमुंड्या को चावल, गुड़, मांस और जल का भोग लगाया जाता है। मंदिर परिसर में भारी संख्या में पहुंचे देवी भक्तों ने तिमुंड्या देवता से मनौतियां मांगी और आशीर्वाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर देव पुजाई समिति के अध्यक्ष भगवती प्रसाद नंबूरी, लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार, बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, अवतारी पुरुष भोला सिंह नामण, भरत सिंह बेजवाड़ी आदि मौजूद रहे।