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Chamoli News: मकान का मुआवजा मिला, भूमि का चयन अभी तक नहीं
Thu, 05 Jun 2025 06:14 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 05 Jun 2025 06:14 PM IST
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फोटो
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
कहा- दो साल बाद भी पुनर्वास पर नहीं हो पाया काम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने ज्योतिर्मठ के आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और समिति के साथ पूर्व में हुए सहमति के बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग उठाई। कहा गया कि मकान का मुआवजा तो मिला लेकिन भूमि का चयन अभी तक नहीं हुआ है। समिति के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
समिति से जुड़े लोगों ने कहा कि दो वर्ष बाद भी प्रभावितों की समस्याएं जस की तस हैं जबकि बरसात शुरू होने वाली है। कहा कि दो वर्ष पूर्व ज्योतिर्मठ दौरे के दौरान सीएम ने आपदा प्रभावितों को पुनर्वास का आश्वासन दिया था। मगर आज भी कई प्रभावित अस्थायी रूप से राहत शिविरों तो कई लोग क्षतिग्रस्त मकानों पर रहने के लिए मजबूर हैं। कई प्रभावितों को मकान का मुआवजा तो मिला लेकिन भूमि का चयन अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में विस्थापन की पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है। राजीव आवास, प्रधानमंत्री आवास, टिन शेड और पत्थरों के बने मकानों का मुआवजा अभी तक तय नहीं हो पाया है। कहा कि जन आक्रोश कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इस मौके पर जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति एवं आपदा प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष अतुल सती, विनोद, किशोरी लाल आदि मौजूद रहे।
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जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
कहा- दो साल बाद भी पुनर्वास पर नहीं हो पाया काम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने ज्योतिर्मठ के आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और समिति के साथ पूर्व में हुए सहमति के बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग उठाई। कहा गया कि मकान का मुआवजा तो मिला लेकिन भूमि का चयन अभी तक नहीं हुआ है। समिति के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
समिति से जुड़े लोगों ने कहा कि दो वर्ष बाद भी प्रभावितों की समस्याएं जस की तस हैं जबकि बरसात शुरू होने वाली है। कहा कि दो वर्ष पूर्व ज्योतिर्मठ दौरे के दौरान सीएम ने आपदा प्रभावितों को पुनर्वास का आश्वासन दिया था। मगर आज भी कई प्रभावित अस्थायी रूप से राहत शिविरों तो कई लोग क्षतिग्रस्त मकानों पर रहने के लिए मजबूर हैं। कई प्रभावितों को मकान का मुआवजा तो मिला लेकिन भूमि का चयन अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में विस्थापन की पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है। राजीव आवास, प्रधानमंत्री आवास, टिन शेड और पत्थरों के बने मकानों का मुआवजा अभी तक तय नहीं हो पाया है। कहा कि जन आक्रोश कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इस मौके पर जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति एवं आपदा प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष अतुल सती, विनोद, किशोरी लाल आदि मौजूद रहे।
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