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Chamoli News: सीमांत क्षेत्रों के ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी समिति
Sun, 25 Jan 2026 04:22 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sun, 25 Jan 2026 04:22 PM IST
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फोटो
लूम्स ऑफ नीती-माणा की ओर से नए डिजाइन के गर्म कपड़े बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। लूूम्स ऑफ नीती-माणा समिति की ओर से सीमा क्षेत्र नीती और माणा घाटी की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वदेशी भेड़ों की ऊन से नए डिजाइन के गर्म वस्त्रों को तैयार करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को पारंपरिक ऊन शिल्प को पुनर्जीवित करने, पालसी (पालतू) भेड़ों की स्वदेशी ऊन से बने हिमालयी वस्त्रों को वापस बाजार में लाने और आजीविका संवर्द्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है और उन्हें ऊन तैयार करने और उनसे कपड़े तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मौजूदा समय में बाजार की डिमांड हल्के और नए डिजाइन के कपड़ों की है जबकि पारंपरिक ऊन, मौलिक बुनाई और ऊन की असली पहचान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। ऐसे में लूम्स ऑफ नीती-माणा का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। लूम्स ऑफ लद्दाख की संस्थापक अभिलाषा बहुगुणा का कहना है कि लद्दाख की महिलाएं स्थानीय ऊन का प्रयोग कर बाजार की मांग को देखते हुए नए डिजाइन के उत्पाद तैयार कर रही हैं। नीती और माणा घाटी के लोग भी स्थानीय ऊन से डिजाइन कपड़े तैयार कर सकते हैं। दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में भी नीती-माणा के ऊनी उत्पादों की डिमांड रही। समिति की सदस्य नंदी राणा ने बताया कि हमें लूम्स ऑफ लद्दाख का भरपूर सहयोग मिल रहा है। साथ ही मानव सेवा समिति के महेश खंकरियाल के साथ ही कुंदन सिंह टकोला, किशोर बड़वाल और नरेंद्र राणा का सहयोग मिल रहा है।
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लूम्स ऑफ नीती-माणा की ओर से नए डिजाइन के गर्म कपड़े बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। लूूम्स ऑफ नीती-माणा समिति की ओर से सीमा क्षेत्र नीती और माणा घाटी की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वदेशी भेड़ों की ऊन से नए डिजाइन के गर्म वस्त्रों को तैयार करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को पारंपरिक ऊन शिल्प को पुनर्जीवित करने, पालसी (पालतू) भेड़ों की स्वदेशी ऊन से बने हिमालयी वस्त्रों को वापस बाजार में लाने और आजीविका संवर्द्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है और उन्हें ऊन तैयार करने और उनसे कपड़े तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मौजूदा समय में बाजार की डिमांड हल्के और नए डिजाइन के कपड़ों की है जबकि पारंपरिक ऊन, मौलिक बुनाई और ऊन की असली पहचान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। ऐसे में लूम्स ऑफ नीती-माणा का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। लूम्स ऑफ लद्दाख की संस्थापक अभिलाषा बहुगुणा का कहना है कि लद्दाख की महिलाएं स्थानीय ऊन का प्रयोग कर बाजार की मांग को देखते हुए नए डिजाइन के उत्पाद तैयार कर रही हैं। नीती और माणा घाटी के लोग भी स्थानीय ऊन से डिजाइन कपड़े तैयार कर सकते हैं। दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में भी नीती-माणा के ऊनी उत्पादों की डिमांड रही। समिति की सदस्य नंदी राणा ने बताया कि हमें लूम्स ऑफ लद्दाख का भरपूर सहयोग मिल रहा है। साथ ही मानव सेवा समिति के महेश खंकरियाल के साथ ही कुंदन सिंह टकोला, किशोर बड़वाल और नरेंद्र राणा का सहयोग मिल रहा है।
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