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अब सेना के हवाले रहेगी बदरीशपुरी
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बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर शीतकाल में छह माह तक बदरीनाथ धाम में आम लोगों की आवाजाही बंद हो जाती है। नवंबर माह के अंत से बदरीनाथ धाम में बर्फबारी शुरू हो जाती है। अप्रैल माह तक बदरीनाथ धाम बर्फ से ढका रहता है। किसी भी आम व्यक्ति को बदरीनाथ से दस किलोमीटर पहले हनुमान चट्टी ने आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। बदरीनाथ धाम में स्थित पुलिस थाना भी हनुमान चट्टी में शिफ्ट हो जाता है। कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम आईटीबीपी के जवानों के हवाले हो जाता है। बदरीनाथ धाम से तीन किलोमीटर की दूरी पर आईटीबीपी का बैस कैंप है।
आईटीबीपी ने किया भंडारे का आयोजन
बदरीनाथ। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की प्रथम वाहिनी सुनील की ओर से बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर धाम में भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। प्रथम वाहिनी के सेनानी बेणुधर नायक ने बताया कि प्रतिवर्ष आईटीबीपी के हिमवीरों की ओर से बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद होने पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। संवाद
लौटने लगे देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीण
बदरीनाथ। ठंड बढ़ जाने के कारण देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीण जिले के निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। प्रतिवर्ष बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने पर माणा गांव के ग्रामीण अपने पैतृक गांवों में लौट आते हैं। माणा गांव में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। ग्रामीण ग्रीष्मकाल में खेतीबाड़ी करने के साथ ही ऊनी वस्त्रों का उत्पादन करते हैं। बदरीनाथ धाम के दर्शनों को पहुंचने वाले तीर्थयात्री इन ऊनी वस्त्रों की खरीदारी करते हैं। माणा गांव के ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने बताया कि शीतकाल में माणा गांव के ग्रामीण गोपेश्वर के समीप घिंघराण और नैग्वाड़ गांव में निवास करते हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर ग्रामीण भी निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। संवाद
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आईटीबीपी ने किया भंडारे का आयोजन
बदरीनाथ। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की प्रथम वाहिनी सुनील की ओर से बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर धाम में भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। प्रथम वाहिनी के सेनानी बेणुधर नायक ने बताया कि प्रतिवर्ष आईटीबीपी के हिमवीरों की ओर से बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद होने पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। संवाद
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लौटने लगे देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीण
बदरीनाथ। ठंड बढ़ जाने के कारण देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीण जिले के निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। प्रतिवर्ष बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने पर माणा गांव के ग्रामीण अपने पैतृक गांवों में लौट आते हैं। माणा गांव में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। ग्रामीण ग्रीष्मकाल में खेतीबाड़ी करने के साथ ही ऊनी वस्त्रों का उत्पादन करते हैं। बदरीनाथ धाम के दर्शनों को पहुंचने वाले तीर्थयात्री इन ऊनी वस्त्रों की खरीदारी करते हैं। माणा गांव के ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने बताया कि शीतकाल में माणा गांव के ग्रामीण गोपेश्वर के समीप घिंघराण और नैग्वाड़ गांव में निवास करते हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर ग्रामीण भी निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। संवाद
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