{"_id":"572213904f1c1be776a92208","slug":"attitudes-toward-wildlife-habitat","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन्य जीवों का रुख बस्तियों की ओर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन्य जीवों का रुख बस्तियों की ओर
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली
Updated Thu, 28 Apr 2016 07:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लगातार जल रहे जंगलों से वातावरण में धुंध छा रखी है, वहीं जंगली जानवरों पर भी आग भारी पड़ रही है। आग से बचने के लिए जानवर बस्तियों की ओर भाग रहे हैं।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार सुबह जंगल की आग से एक हिरन का बच्चा यहां पेट्रोल पंप स्थित एक दुकान में जा घुसा। वन विभाग के अधिकारियों ने हिरन के बच्चे को पकड़कर जंगलों में छोड़ दिया।
विज्ञापन
तहसील मुख्यालय नंदप्रयाग, पश्चिमी पिंडर, धनपुर और नागनाथ रेंज के जंगलों से घिरा है। चारों ओर लगी आग से तहसील मुख्यालय पूरी तरह धुंध की चपेट में है। डिम्मर, किमोली, ऐंड सहित आसपास के जंगल आग की चपेट में है।
विज्ञापन
नौटी रोड स्थित वन विभाग की नर्सरी भी आग की भेंट चढ़ चुकी है। आदिबदरी के एगड़, देवलकोट, सुगड़, तलसारी, उज्जवलपुर सहित आसपास के जंगल आग से धधक रहे हैं। नारायणबगड़, थराली और देवाल रेंज के जंगल भी जल रहे हैं, जिसके चलते जंगली जानवरों की जान भी सांसत में पड़ गई है।
बृहस्पतिवार सुबह एंड के जंगलों में लगी आग से बचने के लिए भागा हिरन का बच्चा पेट्रोल पंप की एक दुकान में जा घुसा। बुधवार को भी नारायणबगड़ के जंगलों की आग से डरा हिरन का बच्चा अस्पताल परिसर में जा घुसा था।
यही नहीं एक हफ्ते पहले आदिबदरी के ढमकर गांव के आस पास जंगलों में लगी आग में एक हिरन का बच्चा फंस गया था, जिसे ढमकर गांव की एक महिला ने बचाया और एक सप्ताह तक गाय का दूध पिलाने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया।