{"_id":"5e972e208ebc3e78c27fa6ae","slug":"adi-guru-shankaracharya-s-throne-to-reach-yoga-meditation-badri-temple-on-28th-gopeshwar-news-drn341792124","type":"story","status":"publish","title_hn":"28 को योग ध्यान बदरी मंदिर पहुंचेगी आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
28 को योग ध्यान बदरी मंदिर पहुंचेगी आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नृसिंह मंदिर से धार्मिक परंपराओं के साथ 28 अप्रैल को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचेगी। यहां से 29 को गद्दी के साथ बदरीश पंचायत में शामिल कुबेर जी और उद्धव जी की डोली बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी।
30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा को लेकर बेहद एहतियात बरती जा रही है। 28 अप्रैल को जोशीमठ नृसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पूर्वाह्न ग्यारह बजे वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर के योग ध्यान बदरी मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर प्रांगण में एकत्रित होने नहीं दिया जाएगा। गद्दी ले जाने वालों के साथ ही मंदिर के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहेंगे। श्रद्धालु घरों की छतों से शंकराचार्य की गद्दी और रावल जी का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत करेंगे। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि इस दौरान कुछ ही लोग मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर के मुख्य कार्यालय को भी बदरीनाथ धाम के बजाय जोशीमठ से ही संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विज्ञापन
30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा को लेकर बेहद एहतियात बरती जा रही है। 28 अप्रैल को जोशीमठ नृसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पूर्वाह्न ग्यारह बजे वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर के योग ध्यान बदरी मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर प्रांगण में एकत्रित होने नहीं दिया जाएगा। गद्दी ले जाने वालों के साथ ही मंदिर के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहेंगे। श्रद्धालु घरों की छतों से शंकराचार्य की गद्दी और रावल जी का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत करेंगे। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि इस दौरान कुछ ही लोग मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर के मुख्य कार्यालय को भी बदरीनाथ धाम के बजाय जोशीमठ से ही संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विज्ञापन