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अंग्रेजी हुकूमत की तानाशाही देख सेना में गये थे आजादी के नायक पदम सिंह
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गैैरसैंण। 107 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पदम सिंह का रविवार को निधन हो गया। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का डटकर मुकाबला किया। गंगेश्वर महादेव घाट पर आज सोमवार को उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राजस्व उपनिरीक्षक शांति प्रसाद डिमरी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पदम सिंह गैरसैंण से करीब तीन किमी दूर अपने गांव खत्रीयाणां में परिवार के साथ रह रहे थे। रविवार सुबह आठ बजे वह घर के छज्जे से नीचे गिर पड़े। उन्हें 108 वाहन से सीएचसी गैरसैंण पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। स्व. पदम सिंह के दामाद विनोद राणा ने बताया कि उनमें देश भक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने सेना में जाने का संकल्प लिया। 24 जून 1940 को वे जब सेना में भर्ती हुए तो उस दौरान आजादी की लड़ाई चरम पर थी। अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने पर उन्हें सात महीने कोलकाता की खुली जेल और सात महीने मुल्तान की जेल में बंद रहना पड़ा। ब्यूरो
राजस्व उपनिरीक्षक शांति प्रसाद डिमरी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पदम सिंह गैरसैंण से करीब तीन किमी दूर अपने गांव खत्रीयाणां में परिवार के साथ रह रहे थे। रविवार सुबह आठ बजे वह घर के छज्जे से नीचे गिर पड़े। उन्हें 108 वाहन से सीएचसी गैरसैंण पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। स्व. पदम सिंह के दामाद विनोद राणा ने बताया कि उनमें देश भक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने सेना में जाने का संकल्प लिया। 24 जून 1940 को वे जब सेना में भर्ती हुए तो उस दौरान आजादी की लड़ाई चरम पर थी। अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने पर उन्हें सात महीने कोलकाता की खुली जेल और सात महीने मुल्तान की जेल में बंद रहना पड़ा। ब्यूरो
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