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उत्तराखंडः हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले से हरीश रावत को झटका

Thu, 31 Mar 2016 11:39 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 31 Mar 2016 11:39 AM IST
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central government challenge nainital high court decision
हरीश रावत - फोटो : ANI

उत्तराखंड विधानसभा में हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश पर 31 मार्च को होने वाला फ्लोर टेस्ट नहीं होगा। संयुक्त खंडपीठ ने बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से विधानसभा में 31 मार्च को मतदान किए जाने संबंधी एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी।

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संबंधित याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद दोनों पक्षों की सहमति से फ्लोर टेस्ट को (कैप्ट इन एबिएंस) कोर्ट ने आस्थगित करते हुए 6 अप्रैल को अंतिम सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। कोर्ट ने इस प्रकरण पर केंद्र सरकार को 4 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। साथ ही याचिकाकर्ता हरीश रावत को 5 अप्रैल तक इसका प्रतिशपथ पत्र देने को कहा है।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी, राकेश थपलियाल तथा ललित शर्मा तथा हरीश रावत की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की।
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बता दें कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की थी। कोर्ट ने शक्ति परीक्षण में बागी विधायक को भी शामिल करने के निर्देश दिए थे।

6 अप्रैल को मामले की अंतिम सुनवाई

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हाईकोर्ट भवन नैनीताल - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त की देखरेख में शक्ति परीक्षण होगा। कोर्ट ने मतदान का परिणाम सील कवर में हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ के इस आदेश को अगले ही दिन हाईकोर्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने चुनौती दे दी। इस याचिका पर बुधवार को दिन भर बहस चली। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कोर्ट का काम यह सुनिश्चित करना है कि अनुच्छेद 356 का राजनैतिक दुरुपयोग न हो।

हाईकोर्ट ने जानना चाहा कि जब 28 मार्च को विधान सभा में शक्ति परीक्षण तय था तो एक दिन पूर्व राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। केंद्र की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की प्रबल आशंकाओं के चलते यह कदम उठाया गया है। उन्होंने एकलपीठ के मतदान के आदेश से पूर्व केंद्र सरकार को जवाब का समय न मिलने पर भी आपत्ति जताई।

लंबी बहस के बाद कोई निष्कर्ष न निकलने पर कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से 31 मार्च के फ्लोर टेस्ट को आस्थगित करते हुए 6 अप्रैल को मामले की अंतिम सुनवाई के लिए मामला रखा है। बहस में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, मनिंदर सिंह चड्ढा तथा भाजपा नेता एवं अधिवक्ता नलिन कोहली भी शामिल रहे।

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