इंदिरा बनी हरीश सरकार की 'सेनापति'
अक्सर नाराजगी जाहिर करने वाली इंदिरा ने संभाला मोर्चा
दलबदल कानून का दोहरा फायदा मिल रहा है कांग्रेस को
अपने कुनबे के विधायकों की धड़कनों को बढ़ने से रोकने में जुटे रावत
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि बीच-बीच में नाराजगी जाहिर करने वाली कैबिनेट मंत्री इंदिरा
हृदयेश ने सरकार को बचाने का मोरचा संभाला हुआ है। ऐसे में अब रावत पूरी तरह से सहज दिखकर अपने कुनबे के विधायकों की
धड़कनों को बढ़ने से रोकने में भी जुटे हुए हैं।
कांग्रेस के बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने की ओर कदम बढ़ाकर कांग्रेस ने अपने लिए बहुमत जुटाने और
अपने कुनबे को सुरक्षित रखने का इंतजाम भी कर लिया है।
भाजपा की रणनीति का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के बागी विधायकों के सरकार के खिलाफ मतदान करने पर टिकी हुई है। कांग्रेस फिलहाल
इसी की काट को खोजने में जुटी हुई है।
बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने दल बदल कानून के उस हिस्से का सहारा लिया है, जिसमें सदस्य के
आचरण के आधार पर सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
बागी विधायकों की संख्या करीब 14
कांग्रेस सूत्रों की माने तो 18 मार्च के घटनाक्रम में यह साबित करने खास चुनौतीपूर्ण भी नहीं है। अब कांग्रेस को इसका दोहरा फायदा
भी मिल रहा है। रडार पर रहे कांग्रेस के कुछ अन्य विधायकों के लिए यह नोटिस अंकुश लगाने का काम भी कर रहा है।
पूर्व सांसद सतपाल महाराज की कांग्रेस से विदाई के दौरान करीब आठ विधायकों के जाने की चर्चा से भी कांग्रेस हलकान हुई थी। इस
समय भी बागी विधायकों की संख्या करीब 14 बताई जा रही थी।
ऐसे में पांच और विधायक भी हैं, जो कांग्रेस को चिंतित कर सकते थे। बहुमत साबित करने के लिए सरकार के पास 28 मार्च तक का
समय है।
कांग्रेस को जितना समय मिला है, उतना ही समय भाजपा के पास भी है और वह इस समय का उपयोग कांग्रेस के दुर्ग को भेदने की
एक और कोशिश के रूप में कर सकती है। ऐसे में बागी विधायकों पर सख्त दिखना कांग्रेस की रणनीतिक मजबूरी भी बन गई है।