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सदन के पटल पर शुक्रवार को पेश होगा आम बजट
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 11 Mar 2016 09:41 AM IST
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उत्तराखंड वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश
- फोटो : file photo
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उत्तराखंड का बजट शुक्रवार को शाम चार बजे सदन के पटल पर रखा जाएगा। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश बजट पेश करेंगी।
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प्रदेश सरकार पहले ही इशारा कर चुकी है कि बजट कर रहित और राजस्व घाटे का होगा। चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार पर आम आदमी को महंगाई से राहत देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और नई योजनाओं को लाने का दबाव भी है। बजट करीब 40 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। हालांकि, कर रहित बजट का दावा कर रही सरकार बजट से पहले ही कई नये करों को अमलीजामा पहना चुकी है। इसके बावजूद अपने संसाधन बढ़ाने का प्रदेश सरकार पर दबाव है। विपक्ष का विरोध जताना भी करीब-करीब तय है।
सरकार की वित्तीय व्यवस्था 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद और नीति आयोग के दौर में डगमगाई हुई है। प्रदेश सरकार एक साल में सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने का ऐलान कर चुकी है। इसके लिए सरकार को अतिरिक्त चार हजार करोड़ रुपये की दरकार भी है। इसके अलावा केंद्रीय सहायता में कमी से भी प्रदेश सरकार को वित्तीय फ्रंट पर परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।
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चुनावी साल होने का दबाव भी सरकार पर है। ऐसे में राज्य के लिए अलग से संसाधन जुटाने का दबाव भी सरकार पर है। बहरहाल यह शुक्रवार को साफ होगा कि वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश किस तरह से इन चुनौतियों का सामना करती हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही कह चुके हैं कि यह आम आदमी का बजट होगा और इसमें किसी नए कर का प्रावधान नहीं किया जाएगा। इतना तय है कि बजट राजस्व घाटे का होगा। पिछले कुछ सालों से प्रदेश में राजस्व सरप्लस बजट की परंपरा रही है।
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ऐसे में सरकार को अपने खर्च पर अंकुश लगाने की भी कोशिश करनी होगी। रोजगार के मोरचे पर सरकार का भरोसा सरकार क्षेत्र में नई नौकरियों पर ही है। यह भी सरकार के गैर योजनागत खर्च को बढ़ाने वाला साबित होगा। खनन प्रदेश सरकार के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। इसके अलावा, वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश उच्च शिक्षा को भी संभाल रही हैं। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता पर खुद उन्होंने भी सवाल उठाए थे।
बजट पर उद्यमियों की भी निगाह है। उद्यमी प्रदेश में अवस्थापना विकास में तेजी लाने, ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ग्राम विकास को सरकार अपना एजेंडा बता रही है। पहाड़ और मैदान के बीच विषमता की खाई तेजी से बढ़ रही है। वित्त मंत्री से इस खाई को भरने की भी उम्मीद की जा रही है।
उपनलकर्मियों ने थाली बजाकर किया विधानसभा कूच
नियमितीकरण, हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और वेतन भत्ते बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों पर उपनल कर्मियों ने थाली बजाकर विधानसभा कूच किया। उपनलकर्मी करीब पांच घंटे रिस्पना पुल से पहले हरिद्वार रोड में धरने पर बैठे रहे। शाम को मुख्यमंत्री ने उपनल कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल को मांगों पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया। उसके बाद ही वह हरिद्वार रोड से उठने को तैयार हुए।
बुधवार को उपनल कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में प्रदेश भर से आए एक हजार से अधिक उपनलकर्मी हिंदी भवन स्थित धरनास्थल पर एकत्र हुए। वहां से जुलूस के रूप में सुभाष रोड, आराघर चौक, हरिद्वार रोड होते हुए विधानसभा कूच किया। पुलिस ने हरिद्वार रोड पर प्रगति विहार के समीप की बैरिकेडिंग पर उपनलकर्मियों को रोक दिया। उपनलकर्मियों ने थाली चम्मच बजाकर वहीं धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
करीब एक घंटे बाद पुलिस प्रशासन की पहल पर उपनलकर्मियों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से वार्ता को विधानसभा गया। वहां कांग्रेस विधायक एवं इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने उपनलकर्मियों की मुख्यमंत्री से वार्ता कराई। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष भावेश जगूड़ी ने बताया कि मुख्यमंत्री से वार्ता सफल रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि हटाए गए उपनल कर्मियों की बहाली, भविष्य में न हटाए जाने का शासनादेश आगामी सोमवार तक जारी कर दिया जाएगा।
संविदाकर्मी घोषित करने, वेतन भत्ते बढ़ाने और महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश आदि मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे। इसके बाद उपनलकर्मी हिंदी भवन स्थित धरनास्थल लौटे। प्रदर्शनकारियों में अमित, आदित्य, त्रिभुवन, कुशाग्र जोशी, कैलाश चंद, नीलम, सुनीता, संगीता, अनिता, सोनिया आदि शामिल रहे।