फ्लोर पर पटखनी के बाद भाजपा में शुरू हुआ मंथन
- रणनीतिकारों ने माना, तमाम स्तरों पर हुई गंभीर चूक
- पीडीएफ, बसपा की नीतियों को लेकर पार्टी में चर्चाओं का दौर
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सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में पटखनी खाने के बाद भाजपा में नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक पार्र्टी से जुड़े पदाधिकारी अपने-अपने स्तर पर इस बात को लेकर मंथन कर रहे हैं कि आखिरकार फ्लोर टेस्ट में बाजी जीतने और कांग्रेस को पटखनी देने में चूक किन स्तरों पर हुई।
अब जबकि फ्लोर टेस्ट में पार्टी विफल हो चुकी है तो उन तमाम पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता था।
पूरे सियासी संकट के दौरान रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी से जुड़े प्रदेश के एक आला पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रणनीति बनाने पर कई स्तरों पर चूक हो गई। उक्त पदाधिकारी ने इसे ‘मिस हैंडलिंग’ करार देते हुए कहा कि चूक तो उसी दिन हो गई थी जिस दिन कांग्रेस के सभी बागी नौ विधायकों को लेकर पार्टी नेता राजभवन पहुंच गए।
कांग्रेस और हरीश रावत भी हुए बेनकाब
राज्यपाल को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में सभी बागी विधायकों ने भी हस्ताक्षर किए। रही सही कसर तब पूरी हो गई, जब सभी बागी विधायकों को भाजपा विधायकों के साथ चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली ले जाया गया। इतना ही नहीं उक्त भाजपा पदाधिकारी का यह भी मानना है कि फ्लोर टेस्ट से पहले पीडीएफ और बसपा विधायकों को साधने को लेकर जो भी प्रयास किए गए, उनमें भी तमाम स्तरों पर चूक हुई है।
भाजपा से ही जुड़े एक और पदाधिकारी ने माना कि इस पूरे प्रकरण से निपटने में शुरू से ही नीतियां गलत हो गई। पीडीएफ और बसपा विधायकों के मन की बात समझने में भी भारी चूक हुई है। लेकिन भाजपा के इन रणनीतिकारों का यह भी मानना है कि इस प्रकरण से पार्टी को ही नुकसान हुआ है, ऐसा भी नहीं है।
पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी की भी छीछालेदर हुई है। घटनाक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक मदन सिंह विष्ट का स्टिंग ऑपरेशन हुआ। इससे कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री हरीश रावत भी बेनकाब हुए हैं। प्रदेश की जनता इनकी करतूतों से रूबरू हो चुकी है। स्टिंग आपरेशन की सीबीआई जांच भी शुरू हो चुकी है। जिससे निजात पाना कांग्रेस पार्टी और खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत को आसान नही होगा।