उत्तराखंडः भाजपा ने निकाला कांग्रेस के अभियानों का तोड़
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उत्तराखंड राष्ट्रपति शासन से कांग्रेस जिस तरह से जन भावनाओं को कैश करने की रणनीति बना रही है उसका तोड़ भाजपा ने निकालना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस सरकार गिराने का दांव उलटा न पड़ जाए इसके लिए भाजपा ने बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं के लिए जवाबी पलटवार का मसौदा तैयार कर लिया है। आलाकमान को डर है कि जनता में यह संदेश न जाए कि प्रदेश में बनी राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रपति शासन के लिए भाजपा जिम्मेदार है। ऐसे में होने वाले सियासी नुकसान को साधने के लिए पार्टी अभी से जनता के बीच जाएगी।
भाजपा की रणनीति है कि हाल में चले पूरे हाई वोल्टेज सियासी ड्रामे के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए दोनों की जनता में खलनायक वाली छवि बनाई जाए। इसके लिए ठोस तर्कों के साथ जनता के बीच जाया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान ने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को बाकायदा इसके लिए अंदरखाने एजेंडा भी तैयार कर दिया है। भाजपा नेताओं का मानना है कि राज्य में पार्टी सरकार बनाए या फिर चुनाव में जाना पड़े, दोनों स्थिति में इस रणनीति का सियासी फायदा मिलना तय है।
कांग्रेस के वार, भाजपा के कटाक्ष
- कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त और केंद्र द्वारा अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर राज्य सरकार को गिराया गया।
- भाजपा ने जवाब बनाया है कि अगर उन्हें सरकार बनानी होती तो यह वर्ष 2012 में कर देते। लेकिन भाजपा हमेशा जनादेश का सम्मान करती है।
- कांग्रेस के बागियों को भाजपा ने और भी कई राजनीतिक प्रलोभन दिए गए।
- भाजपा का तर्क है कि सितारगंज के उनके तत्कालीन विधायक किरण मंडल को अपने साथ कर उनका इस्तीफा दिलाया। यही नहीं, उनके एक अन्य विधायक भीमलाल आर्य को दर्जा मंत्री बनाकर अपने साथ मिलाने की पूर्व सीएम ने पूरी कोशिश की है।
- विधानसभा कूच के दौरान विधायक गणेश जोशी और समर्थकों द्वारा शक्तिमान घोड़े पर हमले कर टांग तोड़कर भाजपा ने अपना निर्मम चेहरा दिखा दिया है।
- भाजपा का तर्क है कि घोड़े को विधायक या समर्थकों ने नहीं मारा, बल्कि पुलिस की लापरवाही से घोड़ा गिरा। यही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं को भी जमकर पीटा गया। बिना विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किए विधायक की गिरफ्तारी और कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उत्पीड़न किया गया।
भाजपा के लिए भी कसौटी पर खरा उतरने का वक्त
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
कांग्रेस सरकार के चार वर्ष के शासनकाल में जिन घोटाले-घपलों पर भाजपा ने सदन से सड़क तक आंदोलन किया, उन्हीं मसलों पर उसकी अग्निपरीक्षा होगी। आपदा घोटाले से लेकर पुनर्निर्माण, मुआवजा धनराशि आवंटन, सरकारी भूमि के खुर्दबुर्द और आबकारी सीडी प्रकरण जैसे आधा दर्जन मामलों में भाजपा सदन से लेकर सड़क तक कांग्रेस सरकार को घेरती रही है।
प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद अब गेंद भाजपा के पाले में है। जिन मुद्दों में वह सीबीआई जांच की मांग उठाती रही है उनको लेकर अब पुरानी फाइलें खुलती हैं या नहीं यह बड़ा सवाल है। प्रदेश की सत्ता प्रत्यक्ष रूप से अब केंद्र के हाथ में है। प्रदेश में भाजपा पर अब तक लगते रहे मित्र विपक्ष के आरोप से उबरने का मौका है।
भाजपा के पास सबसे बड़ा सियासी मुद्दा आपदा पुनर्निर्माण और मुआवजे की बंदरबांट का रहा है, जिसके सहारे वह अगले विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही थी। सूचना आयोग के आपदा से जुड़े एक प्रकरण में सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद भाजपा लगातार सरकार को घेरती रही है। भाजपा का यह आरोप रहा है कि राज्य सरकार सीबीआई को जांच की संस्तुति इसलिए नहीं कर रही, क्योंकि उससे सरकार संकट में आ जाएगी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
चुनाव को अभी एक वर्ष है और राष्ट्रपति शासन लागू होने से भाजपा ड्राइविंग सीट पर है। ऐसे में जिस केंद्र सरकार से जांच करवाने की सिफारिश का मुद्दा प्रदेश भाजपा उठाती रही है, उसी के हाथ सत्ता की चाबी आ गई है। अगर भाजपा प्रदेश में सरकार बनाने का राह चुनती है तो अब तक लगाए कांग्रेस सरकार के आरोपों को सच साबित करने का मौका है, जिसमें विफल होने पर आगामी चुनाव में भाजपा पर उलटा दांव पड़ सकता है।
जांच हुई तो बागियों का क्या होगा
अगर केंद्र घपले-घोटालों के आरोपों वाली फाइलों को जांच के लिए खोलती है तो कांग्रेस के नौ बागियों, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री के अलावा दो कैबिनेट मंत्री के दर्जा प्राप्त हैं, उनका क्या होगा? फाइलों की जांच खुलने से इनपर भी आंच आ सकती है, जिससे मामला बिगड़ सकता है। ऐसे में भाजपा के लिए पुराने मामलों की जांच करवाना आसान नहीं होगा।
इन्हें मुद्दों पर घिरती रही कांग्रेस सरकार
- केदारनाथ पुनर्निर्माण में घोटाले के आरोप
- आपदा के बाद प्रभावितों को वितरित मुआवजा राशि
- ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार में बिल्डरों को जमीन देने का मामला
- आबकारी नीति को लेकर सार्वजनिक हुआ सीडी प्रकरण
- प्रदेश में अवैध खनन और खनन पट्टों का आवंटन
- नैनीसार और चाय बागान की खरीद का मामला
- हीरो मोटो कार्प को जमीन देने का मामला