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केहरी गांव में सभी निर्माण कार्य पर लगी रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 17 May 2016 11:28 AM IST
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मंत्री के भवन का निर्माण कार्य रोक दिया गया था।
- फोटो : AmarUjala
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केहरी गांव में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी के विवादित निर्माण के साथ ही क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। इस बार यह रोक कैंट बोर्ड ने लगाई है। एमडीडीए पहले ही क्षेत्र को अपने अधीन नहीं होने की बात कहकर पहले ही पल्ला झाड़ लिया है।
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जानकारी के मुताबिक जमीन कैंट बोर्ड की है, लेकिन राजस्व विभाग से मालिकाना हक की पत्रावली मिलने तक बोर्ड अग्रिम कार्रवाई के लिए रुका हुआ है। अगर रिकार्ड में कैंट क्षेत्र सामने आया तो वहां के अवैध निर्माण पर कार्रवाई के साथ पुराने भवनों से हाउस और वाटर टैक्स सहित अन्य शुल्क भी वसूले जाएंगे।
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मंत्री के निर्माण पर कार्रवाई नहीं
मालूम हो कि पिछले माह यूपी के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी केहरी गांव में अपने मकान का निर्माण करवा रहे थे। एक महिला ने इस जमीन को सरकारी बताते हुए निर्माण पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। एमडीडीए और कैंट ने मामले की संयुक्त जांच की तो पता चला जमीन कैंट के अधिकार क्षेत्र में है।
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इसके बाद एमडीडीए ने कैंट अधिकारियों को पत्र भेजकर जमीन अपने अधिकार क्षेत्र में नहीं होने की बात कहते हुए फाइल क्लोज कर दी थी। अब गढ़ी कैंट छावनी के अधिकारियों ने डीएम को पत्र लिखकर राजस्व विभाग से दोबारा से इसकी जांच की मांग की है। कैंट के अधिकारी रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। अगर रिपोर्ट उनके पक्ष में आई तो केहरी गांव के ग्रामीणों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यहां के लोग चाहते नहीं है कि यह क्षेत्र कैंट के अधिकार में आए।
कैंट के रिकार्ड में नहीं केहरी गांव
सीईओ सुब्रत पाल ने कहा कि केहरी गांव कैंट के रिकार्ड में नहीं है। आजतक कैंट ने इनसे कभी कोई टैक्स नहीं लिया है और यहां के लोग कैंट क्षेत्र की वोटर लिस्ट में भी नहीं शामिल हैं। अगर यह लोग यहां निर्माण कार्य कर रहे हैं तो किसी ना किसी से अनुमति जरूर ली होगी। पर कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है, अगर जमीन कैंट की निकली तो इन लोगों पर कार्रवाई होगी।
विवादित जमीन और इसके आसपास के लोगों को नोटिस भेजकर निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है। रिपोर्ट कैंट के पक्ष में आई तो इन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनसे टैक्स वसूला जाएगा।
-सुब्रत पाल, सीईओ गढ़ी कैंट छावनी परिषद